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अमेरिका और इराक के संबंधों में नया मोड़: 2026 तक अमेरिकी सैनिकों की वापसी

अमेरिका और इराक के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है, जिसमें अमेरिकी सेना सितंबर 2026 तक इराक से पूरी तरह वापस लौटने की योजना बना रही है। यह निर्णय 2003 में शुरू हुए सैन्य अभियान के अंत का प्रतीक है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब इराक में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है, जबकि इराकी प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि अमेरिकी कंपनियां वहां निवेश जारी रखेंगी। जानें इस बदलाव के पीछे की वजहें और भविष्य की संभावनाएं।
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अमेरिका-इराक संबंधों में बदलाव

अमेरिका और इराक के बीच एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। दोनों देशों के अधिकारियों ने यह घोषणा की है कि अमेरिकी सेना सितंबर 2026 के अंत तक इराक से पूरी तरह से वापस लौट जाएगी। इस निर्णय के साथ, 2003 में इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के शासन को समाप्त करने के लिए शुरू किया गया अमेरिकी सैन्य अभियान लगभग 23 वर्षों के बाद समाप्त हो जाएगा। हाल के वर्षों में, इराक में अमेरिकी सैनिकों की भूमिका केवल आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ सीमित अभियानों तक ही रह गई थी.


ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अब अमेरिका को इराक में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप ने कहा, "हमें नहीं लगता कि अब वहां सेना की जरूरत है। इराक के साथ हमारे संबंध अब कहीं अधिक व्यापक हो चुके हैं। जरूरत पड़ने पर हम उनकी मदद और सुरक्षा के लिए तैयार रहेंगे, लेकिन हमें नहीं लगता कि इसकी आवश्यकता पड़ेगी।"


अली अल-ज़ैदी का बयान

प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने दुभाषिए के माध्यम से कहा, "30 सितंबर तक अमेरिकी सेनाएं इराक से बाहर हो जाएंगी, जबकि अमेरिकी कंपनियां इराक में निवेश और कारोबार करती रहेंगी।" अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने बाद में एक बयान में कहा कि वह 2024 में इराक के साथ हुए उस समझौते की पुष्टि कर रहा है, जिसके तहत इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मिशन को समाप्त किया जाना था।


सुरक्षा बलों का विकास

पिछले कुछ वर्षों में, अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान की जिम्मेदारी धीरे-धीरे इराकी सुरक्षा बलों को सौंप दी थी। अमेरिकी सेना द्वारा प्रशिक्षित इराकी सैनिक अब सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत अमेरिकी सैनिक विभिन्न ठिकानों से हटते गए और अपनी सैन्य मौजूदगी को सीमित करते रहे।


2003 का सैन्य अभियान

अमेरिका ने मार्च 2003 में इराक पर हमला किया था, जिसे 'शॉक एंड ऑ' नामक व्यापक बमबारी अभियान के तहत अंजाम दिया गया था। इस अभियान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए, जिससे इराक के कई हिस्सों को भारी नुकसान हुआ और बाद में अमेरिकी जमीनी सेना ने बगदाद में प्रवेश किया। यह सैन्य अभियान इस दावे पर आधारित था कि सद्दाम हुसैन ने बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार छिपाए हुए हैं, लेकिन बाद में ऐसे किसी भी हथियार का कोई प्रमाण नहीं मिला।