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अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता: क्या है इसका महत्व?

अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर सहमति जताई है, जिसमें दोनों देशों ने सैन्य गतिविधियों को रोकने का निर्णय लिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस कूटनीतिक उपलब्धि की घोषणा की, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पुष्टि की। समझौते के तहत, यदि ईरान परमाणु समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। इस समझौते का क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता: क्या है इसका महत्व?

नई दिल्ली में शांति समझौते की घोषणा


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर सहमति जताई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते की जानकारी दी, जिसमें दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कूटनीतिक सफलता की पुष्टि की है। यह समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया जाएगा।


शहबाज शरीफ की कूटनीतिक उपलब्धि

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर इस समझौते को एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि गहन मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए सहमत हुए हैं। शरीफ ने इस प्रक्रिया में कतर की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और सऊदी अरब तथा तुर्की के योगदान को भी रेखांकित किया। औपचारिक हस्ताक्षर से पहले संबंधित देशों के बीच बैठकों का दौर शुरू होगा।


डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की पुष्टि की

प्रधानमंत्री शरीफ के बयान के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस समझौते की पुष्टि की। ट्रंप ने लिखा कि ईरान के साथ समझौता अब पूरी तरह से संपन्न हो चुका है।


परमाणु समझौते की शर्तों का पालन

एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान अंतिम परमाणु समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका दोबारा सैन्य हमले शुरू करने पर विचार कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में 'रक्षक' की भूमिका निभाएगा, जिसके बदले में क्षेत्र के राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को मिलेगा।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्रीय राजनीति पर प्रभाव

ट्रंप ने आश्वासन दिया है कि इस समझौते के लागू होने के बाद 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों की आवाजाही हमेशा के लिए शुल्क-मुक्त रहेगी। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आपत्तियों के बावजूद, ट्रंप ने इस समझौते का समर्थन किया और कहा कि यह एक बड़े संकट को टालने में मदद करेगा। अब 19 जून को होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।