अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौता: युद्ध का अंत
समझौते की घोषणा
अमेरिका और ईरान के बीच विभिन्न विवादों के बावजूद, अंततः एक महत्वपूर्ण समझौता संपन्न हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर कर युद्ध समाप्त करने की घोषणा की है। यह एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि दोनों देशों ने इस समझौते की पुष्टि भी की है। इस 14 बिंदुओं वाले मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव को समाप्त करना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को जारी रखना है। इससे पहले, इजरायल ने इस समझौते को मानने से इनकार किया था, जिसके चलते ट्रंप ने इजरायल को सलाह दी है कि उसे बेहतर कार्य करना चाहिए।
G7 सम्मेलन में हस्ताक्षर
G7 सम्मेलन में भाग लेने के दौरान, डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते पर फ्रांस में ही हस्ताक्षर किए। एक वीडियो में देखा जा सकता है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर कार्यक्रम की मेज पर ट्रंप ने इस समझौते पर दस्तखत किए। इस अवसर पर मैक्रों भी उपस्थित थे, और दस्तखत के बाद सभी ने ताली बजाकर इसका स्वागत किया। कार्यक्रम के बाद, ट्रंप ने मीडिया के सामने चिल्लाकर कहा, 'It's Signed' यानी समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं।
इजरायल पर ट्रंप की टिप्पणी
इस समझौते और इजरायल के संदर्भ में ट्रंप ने कहा, 'हमने समझौता जारी कर दिया है और इसकी एक प्रति इजरायल को भी भेजी है। वे एक अच्छे साथी रहे हैं। मेरा मानना है कि इजरायल हिज्बुल्ला के मामले में और बेहतर कर सकते हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि उन्हें उनकी रक्षा के लिए कोई अभियान शुरू करना चाहिए, लेकिन अगर दो ड्रोन रेगिस्तान में गिरते हैं और कोई नुकसान नहीं होता है, तो बेरुत में इमारतें नष्ट नहीं करनी चाहिए।'
US-ईरान डील के मुख्य बिंदु
- सभी प्रकार की सैन्य गतिविधियाँ तुरंत समाप्त होंगी, जिसमें लेबनान भी शामिल है।
- दोनों देशों की सहमति से 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौता किया जाएगा।
- अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई घेराबंदी समाप्त होगी और प्रतिबंध भी हटाए जाएंगे।
- प्रारंभिक 60 दिनों के दौरान सभी वाणिज्यिक जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित और निःशुल्क गुजरेंगे।
- ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को क्रमशः लौटाया जाएगा।
- ईरान में अमेरिका की सहायता से मरम्मत का कार्य किया जाएगा, जिसके लिए अमेरिका 300 बिलियन डॉलर प्रदान करेगा।
- सूत्रों के अनुसार, ईरान ने किसी भी प्रकार के परमाणु हथियार न रखने और न बनाने पर सहमति जताई है।
