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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: क्या है इसके पीछे का कारण?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित किया है। हाल के हमलों के सिलसिले ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है। जानें इस संघर्ष का प्रभाव समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या हो सकता है। क्या यह टकराव और बढ़ेगा? इस लेख में हम इन सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
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तनाव की नई परतें


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब और भी गहरा हो गया है। युद्धविराम समझौते के टूटने के बाद, दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। हाल ही में, अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर एक बार फिर से हमला किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह लगातार 13वीं रात है जब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा रही है।


हमले की समयसीमा

अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने बताया कि शुक्रवार शाम लगभग 6:45 बजे पूर्वी अमेरिकी समय के अनुसार ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों का नया दौर शुरू हुआ। CENTCOM ने कहा कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान को जवाबदेह ठहराना और वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से उत्पन्न खतरों को कम करना है।




क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान की समुद्री गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता को कमजोर करने के लिए अभियान जारी रहेगा। हालांकि, इन लगातार हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।


सहयोगी देशों पर हमले

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर अब अन्य देशों पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान और उसके सहयोगी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के साझेदार देशों से जुड़े ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। जॉर्डन, बहरीन और कुवैत की ओर से ईरान से जुड़े मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई है। कुवैत और इराक के बीच स्थित अल-अब्दली सीमा चौकी पर भी हमले की खबर आई है। इन घटनाओं ने क्षेत्र के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।


बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमले

ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना ने देश के एकमात्र सक्रिय वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा रिएक्टर के पास स्थित बुशहर क्षेत्र में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्टों में कहा गया है कि इस इलाके में पिछले कुछ दिनों के दौरान कई बार हमले हो चुके हैं। ईरान ने भी अमेरिकी हमलों में लोगों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी दी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इराक सीमा के पास शालमचेह चौकी पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में दो लोगों की मौत हुई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए।


ईरान का जवाबी हमला

लगातार अमेरिकी हमलों के बावजूद, ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता का इस्तेमाल जारी रखा है। तेहरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी सेना की कार्रवाई का असर महत्वपूर्ण ऊर्जा और जल सुविधाओं पर भी पड़ा है। कुवैत में जल विलवणीकरण संयंत्रों और ऊर्जा से जुड़े ढांचे को लेकर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं। इससे क्षेत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।


समुद्री मार्गों पर खतरा

इस संघर्ष का असर समुद्री मार्गों पर भी पड़ रहा है। ईरान समर्थित हूती समूह ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी ली है। समूह ने इसे सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी का हिस्सा बताया। इस घटनाक्रम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता और बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।


तनाव का केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य

अमेरिका ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। दूसरी ओर, ईरान ने भी कहा है कि अगर उसकी नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया तो वह क्षेत्रीय तेल, गैस और बिजली से जुड़े ढांचे पर जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि उसके बुनियादी ढांचे पर हमला होने की स्थिति में कड़ा जवाब दिया जाएगा।


ईरानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसे हालात में क्षेत्र से तेल निर्यात प्रभावित हो सकता है। गुरुवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक विस्फोट की भी जानकारी दी। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, तीन तेल टैंकरों में से एक में आग लग गई। ईरान ने इस क्षेत्र पर अपने नियंत्रण का भी दावा किया है।