अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: नए प्रतिबंधों की घोषणा
अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को वाशिंगटन ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से जुड़े एक महत्वपूर्ण वित्तीय नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई करते हुए कई नए प्रतिबंधों की घोषणा की। अमेरिका ने एक प्रमुख कारोबारी सहित कुल 14 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल ही में हुए तेल टैंकरों पर हमलों के बाद ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अली अंसारी पर आरोप
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य दुबई में रहने वाले ईरानी बैंकर और व्यवसायी अली अंसारी हैं। अमेरिका का आरोप है कि अंसारी लंबे समय से ऐसे वित्तीय नेटवर्क का संचालन कर रहे थे, जो ईरान की सत्ता और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आर्थिक सहायता प्रदान करता था। ब्रिटेन ने भी पहले अंसारी पर इसी तरह के आरोपों के आधार पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक धन का उपयोग विदेशों में बड़ी मात्रा में संपत्तियां खरीदने और व्यावसायिक निवेश करने में किया।
विदेशों में फैला निवेश का जाल
वित्त मंत्रालय के अनुसार, अंसारी ने कई देशों में फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का उपयोग कर करोड़ों डॉलर की संपत्ति बनाई। यह नेटवर्क सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत स्मार्ट ग्लोबल लिमिटेड नामक कंपनी के माध्यम से संचालित किया गया। जांच में यह सामने आया कि इस कंपनी ने यूरोप, खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रियल एस्टेट और व्यावसायिक परियोजनाओं में निवेश किया। अमेरिका का दावा है कि इन निवेशों से होने वाला लाभ केवल अंसारी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका फायदा ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा प्रतिष्ठान को भी मिलता था।
एक्सचेंज हाउस और विदेशी कंपनियों पर कार्रवाई
अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने ईरान के तीन एक्सचेंज हाउसों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। एजेंसी का आरोप है कि ये संस्थाएं प्रतिबंधित ईरानी बैंकों के लिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में मदद करती थीं और अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए शेल कंपनियों का सहारा लेती थीं। इसके अलावा, हांगकांग की CDM Trading Limited और संयुक्त अरब अमीरात की Naba Alzaki Raw Materials Trading LLC को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन कंपनियों ने ईरानी वित्तीय नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अमेरिका का बयान
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के सत्तारूढ़ वर्ग को मिलने वाली आर्थिक सहायता के रास्तों को बंद करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे हर नेटवर्क को निशाना बनाएगा जो ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बनाने में मदद करता है। वहीं, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका भविष्य में भी मोजतबा खामेनेई और ईरान के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
समझौते पर उठे नए सवाल
ईरान ने अमेरिका के ताजा प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा है कि यदि पिछले महीने हुए समझौते की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया गया तो वह अपने हितों की पूरी ताकत से रक्षा करेगा। ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि दबाव और प्रतिबंधों से उसकी नीति नहीं बदलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की नई कार्रवाई दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन की भावना के विपरीत दिखाई देती है। उस समझौते में नए प्रतिबंध न लगाने और क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य गतिविधियां सीमित रखने की बात कही गई थी।
