अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता: वैश्विक राहत की नई किरण
अमेरिका-ईरान शांति समझौते का महत्व
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते ने न केवल इन देशों के नागरिकों को, बल्कि पूरी दुनिया को राहत दी है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में 7000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और आर्थिक नुकसान 160 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। इस युद्ध ने अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि को कमजोर किया है, जबकि ईरान आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। यदि हम आज के ईरान की तुलना दो-तीन साल पहले के ईरान से करें, तो कई कमजोरियां स्पष्ट होती हैं। फिर भी, ईरान ने अपनी इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के बल पर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सफलता प्राप्त की है। युद्ध से पहले ईरान में सत्ता के खिलाफ असंतोष था, लेकिन युद्ध ने उस असंतोष को दबा दिया और राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा दिया। अब, युद्ध समाप्त होने के बाद, असंतोष फिर से उभरने की संभावना है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के अनुसार, ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही, भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग न करने का वादा भी किया गया है। दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत करने के लिए सहमत हुए हैं, और इस समय सीमा को आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है। प्रारंभिक चरण में, अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी को धीरे-धीरे समाप्त करेगा और 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह खत्म कर देगा। वहीं, तेहरान ने 60 दिनों की अवधि के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना किसी शुल्क के व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को बहाल करने का वादा किया है।
अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रकार के प्रतिबंधों को समाप्त करने का आश्वासन दिया है, जिसमें यूएन सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के प्रस्ताव शामिल हैं। ये सभी प्रतिबंध आपसी सहमति से हटाए जाएंगे, जिसे अंतिम समझौते में शामिल किया जाएगा। प्रतिबंध हटने तक, अमेरिकी ट्रेजरी ईरानी कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने के लिए तुरंत छूट जारी करेगी। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के फंड और संपत्तियों को अनफ्रीज़ करने पर भी सहमत हो गया है।
परमाणु मुद्दे पर, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह न तो परमाणु हथियार हासिल करेगा और न ही उनका विकास करेगा। दोनों देश तेहरान के पास मौजूद एनरिच्ड मैटीरियल के स्टॉक को संभालने के लिए आपसी सहमति से तरीके अपनाने पर सहमत हुए हैं। इस मेमोरेंडम में यूरेनियम संवर्धन और ईरान की नागरिक परमाणु जरूरतों से संबंधित अन्य मामलों पर बातचीत का भी प्रावधान है। अमेरिका ने ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास पैकेज का वादा किया है, जिसका विवरण 60 दिनों के भीतर तय किया जाएगा।
हालांकि, इजराइल द्वारा लेबनान पर किए गए हमले के कारण समझौते को लेकर अगली बातचीत में रुकावट आई है। ईरान की मांग है कि हिजबुला पर हमले न हों, जबकि इजराइल का कहना है कि वह अमेरिका का गुलाम नहीं है और हिजबुला के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जमीनी हकीकत यह है कि अमेरिका के सहयोग के बिना इजराइल के लिए युद्ध जारी रखना कठिन होगा, लेकिन कुछ समय के लिए दबाव बना रह सकता है।
समझौते के भविष्य का निर्धारण अगले 60 दिनों में होगा, जिसमें यह देखा जाएगा कि कौन किस पर कितना दबाव डाल सकता है। वर्तमान में, इस शांति समझौते का वैश्विक स्तर पर स्वागत किया गया है और राहत की एक नई लहर महसूस की जा रही है।
