अमेरिका का ईरान पर नया हमला: एलपीजी नेटवर्क पर प्रतिबंध
अमेरिका का सख्त रुख
नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर कठोर कदम उठाया है। इस बार वह एक ऐसे नेटवर्क को निशाना बना रहा है, जो ईरानी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) को अन्य देशों के ईंधन के रूप में पेश कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंचाने का आरोप है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस नेटवर्क के माध्यम से ईरानी गैस की असली पहचान को छिपाया जा रहा था और प्रतिबंधों से बचने के लिए जटिल व्यापारिक तरीकों का सहारा लिया जा रहा था।
नए प्रतिबंधों की घोषणा
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने शुक्रवार को एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी दी। अधिकारियों का कहना है कि ये संस्थाएं और व्यक्ति ईरान पर लागू प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रहे थे। अमेरिका के अनुसार, यह नेटवर्क ईरानी एलपीजी को ओमानी ईंधन के रूप में पेश कर विभिन्न देशों में पहुंचाता था, जिससे ईंधन की असली उत्पत्ति छिपाने का प्रयास किया जाता था।
Today, Treasury’s Office of Foreign Assets Control is designating a network of individuals, entities, and vessels responsible for shipping hundreds of millions of dollars’ worth of Iranian-origin liquid petroleum gas⸺intentionally disguised as Omani LPG⸺to end users in South…
— Treasury Department (@USTreasury) June 5, 2026
दक्षिण और पूर्वी एशिया में वितरण
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से बांग्लादेश समेत दक्षिण और पूर्वी एशिया के कई देशों में एलपीजी पहुंचाई जा रही थी। जांच में यह भी सामने आया कि व्यापारिक दस्तावेजों और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव कर ईंधन की पहचान को छिपाया जाता था। वाशिंगटन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को कमजोर करती हैं और ईरान को वैकल्पिक माध्यमों से राजस्व जुटाने का अवसर देती हैं।
फ्रंट कंपनियों का उपयोग
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क ने अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कई देशों में स्थापित फ्रंट कंपनियों का सहारा लिया। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात और चीन में मौजूद कुछ कंपनियों के माध्यम से कारोबारी लेन-देन किए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, विदेशी बैंक खातों और तथाकथित "शैडो फ्लीट" से जुड़े जहाजों का भी इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन जहाजों के माध्यम से माल की वास्तविक उत्पत्ति को छिपाने और प्रतिबंधों से बचने की कोशिश की गई।
विदेशी मुद्रा कंपनी पर भी कार्रवाई
अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को केवल ऊर्जा कारोबार तक सीमित नहीं रखा है। एक ईरानी विदेशी मुद्रा विनिमय कंपनी को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है। आरोप है कि इस कंपनी ने प्रतिबंधित ईरानी बैंकों की ओर से बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन कराने में सहायता की। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसे वित्तीय नेटवर्क ईरान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद आर्थिक गतिविधियां जारी रखने में मदद करते हैं।
