अमेरिका का ग्रेटर टुनब पर हमला: ईरान के खिलाफ बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने चौथे दिन भी अपनी तीव्रता बनाए रखी है। बुधवार को अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई की। इस हमले का लक्ष्य फारस की खाड़ी में स्थित ग्रेटर टुनब द्वीप था, जहां लगभग 90 मिनट तक मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग किया गया।
अमेरिका का हमला कैसे हुआ?
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला वॉशिंगटन समयानुसार सुबह 7:30 बजे, जो कि तेहरान में दोपहर 3 बजे था, संपन्न हुआ। कमांड ने X पर जानकारी साझा की कि "90 मिनट के इस ऑपरेशन में ग्रेटर टुनब की तटीय रक्षा प्रणालियों, क्रूज़ मिसाइल भंडार और लॉन्च साइटों को सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया।" CENTCOM का दावा है कि इस कार्रवाई ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की ईरान की क्षमता को कमजोर कर दिया है।
ग्रेटर टुनब का महत्व
ग्रेटर टुनब एक छोटा सा द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल केवल 10.3 वर्ग किलोमीटर है, और यह होर्मुज़ के मुहाने के निकट स्थित है। यह स्थान रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से गुजरता है। ईरान लंबे समय से इस द्वीप का उपयोग निगरानी और जहाजों पर हमले के लिए करता आ रहा है। CENTCOM के एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि पिछले 7 दिनों में ईरान ने यहां से 7 वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए हैं, जिनमें कई क्रू सदस्य मारे गए या लापता हुए हैं।
ईरान और UAE के बीच विवाद
ग्रेटर टुनब पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दोनों का दावा है, लेकिन वर्तमान में इसका प्रशासन ईरान के पास है। यह द्वीप होर्मुज़ के निकट होने के कारण अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, अमेरिकी हमलों में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के बामपुर में तैनात '388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड' के 7 सैनिक मारे गए। रिपोर्ट में कहा गया कि हमले में कम से कम 13 मिसाइलें दागी गईं। ईरानी सेना ने इस आक्रामकता का माकूल जवाब देने की बात कही है।
ट्रंप का प्रस्ताव वापस
इस बीच, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों ने इसके बदले अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करने की पेशकश की है। हालांकि, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को तेज करने की योजना बना रहा है, और ग्रेटर टुनब पर हमला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
