अमेरिका का नया बिल: रूस से तेल खरीदने पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिका में एक नया बिल प्रस्तावित किया गया है, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। 60 से अधिक सीनेटरों का समर्थन प्राप्त होने के बाद, इस बिल के पारित होने की संभावना बढ़ गई है। यह कानून भारत, चीन, और अन्य देशों पर लागू होगा, जबकि यूरोपीय देशों को छूट दी जाएगी। जानें इस बिल का राजनीतिक महत्व और इसके संभावित प्रभाव।
| Jul 18, 2026, 13:05 IST
रूसी तेल पर टैरिफ लगाने वाला बिल
अमेरिका में एक नया बिल प्रस्तावित किया गया है, जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। इस बिल को 60 से अधिक अमेरिकी सीनेटरों का समर्थन प्राप्त हुआ है। यह कानून उन देशों पर लागू होगा जो रूस के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद जारी रखते हैं। यह कदम रूस को वित्तीय सहायता रोकने के लिए अमेरिका द्वारा उठाए गए सबसे कठोर कदमों में से एक है। सीनेटरों के समर्थन के बाद, इस बिल के पारित होने की संभावना काफी बढ़ गई है। यदि यह कानून लागू होता है, तो भारत, चीन, अजरबैजान, और हंगरी जैसे देशों पर रूसी तेल खरीदने के कारण 100% टैरिफ लागू होगा। इस बिल को सीनेटर लिंसे ग्राहम ने तैयार किया था, जिनका हाल ही में यूक्रेन से लौटने के बाद निधन हो गया। हालांकि, यह बिल अमेरिका के यूरेनियम आयात और उन यूरोपीय सहयोगियों को छूट देता है जो सीमित मात्रा में रूसी गैस खरीदते हैं। इस बिल के तहत 15 यूरोपीय खरीदारों को छूट दी गई है।
बिल का राजनीतिक महत्व
यह बिल उन देशों पर कोई टैरिफ नहीं लगाएगा जो अपने कुल गैस आयात का 15% से कम रूस से खरीदते हैं। इसका उद्देश्य इन देशों की निर्भरता को कम करना है। इसके अलावा, इस बिल में रूसी यूरेनियम की खरीद पर भी छूट दी गई है, जिसे अमेरिका बड़े पैमाने पर खरीदता है। 60 से अधिक सीनेटरों के समर्थन के बाद, इसे व्हाइट हाउस का भी समर्थन मिल रहा है। हाल ही में सीनेटर लिंसे ग्राहम के निधन के बाद इस बिल का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले इस कानून को तैयार करने में लगभग दो साल बिताए। यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका किस तरह से दोहरे मापदंड अपनाता है, जबकि यूरोपीय देशों को छूट दी जा रही है, वहीं भारत और चीन जैसे देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस बिल का केंद्र बिंदु सेक्शन 113 है, जो राष्ट्रपति को निर्देश देता है कि वह इन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100% टैरिफ लगाएं।
बिल का दायरा और प्रभाव
इस बिल का मुख्य लक्ष्य चीन और भारत को ही माना जा रहा है। यह बिल रूस से आयात होने वाले सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी देता है। इसमें रूस के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व, बड़े बैंकों और रक्षा उद्योग से जुड़ी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी है। हालांकि, यह बिल रूस से यूरेनियम खरीदने के प्रतिबंधों से स्पष्ट रूप से छूट देता है। इस प्रकार, अमेरिका और यूरोप के लिए कई छूट के प्रावधान किए गए हैं, जबकि भारत और चीन जैसे देशों पर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं। इस बिल पर भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अमेरिका का यह रवैया यह दर्शाता है कि वह विश्वसनीय नहीं है और रूस के साथ संबंधों की सजा भारत और चीन को देना चाहता है।
