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अमेरिका का भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ: जबरन मजदूरी के खिलाफ सख्त कदम

अमेरिका ने भारत से आयातित कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जो जबरन मजदूरी से जुड़े हैं। यह कदम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की जांच के बाद उठाया गया है। भारत को पहले 12.5 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ सकता था, लेकिन सकारात्मक बातचीत के चलते इसे 10 प्रतिशत पर सीमित किया गया। इसके अलावा, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इससे प्रभावित उत्पादों की सूची।
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अमेरिका का नया टैरिफ निर्णय


नई दिल्ली: अमेरिका ने जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए भारत से आयातित कुछ वस्तुओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की जांच के परिणामस्वरूप उठाया गया है और नई दरें शुक्रवार से लागू हो गई हैं। अमेरिका का कहना है कि जिन देशों ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, उन पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है।


अतिरिक्त टैरिफ का कारण

USTR के अनुसार, यह निर्णय सेक्शन 301 जांच के आधार पर लिया गया है। अमेरिका का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी से बने उत्पादों को समाप्त करना आवश्यक है। इसी कारण से उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जहां श्रम मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई है।


भारत को 10% टैरिफ में रखा गया

शुरुआत में यह अनुमान लगाया गया था कि भारत पर 12.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। लेकिन श्रम मानकों पर भारत और अमेरिका के बीच सकारात्मक बातचीत के बाद, भारत को 10 प्रतिशत के निचले स्लैब में रखा गया। इससे भारत पर संभावित अधिक शुल्क का बोझ कम हो गया है।


पाकिस्तान और बांग्लादेश भी प्रभावित

भारत के अलावा, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, कनाडा, मेक्सिको, अर्जेंटीना जैसे कई देशों को भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वाले समूह में शामिल किया गया है। वहीं, कुछ अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा।


भारत की निगरानी बढ़ी

सूत्रों के अनुसार, संभावित अतिरिक्त टैरिफ को ध्यान में रखते हुए, भारत ने पहले ही फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान और निगरानी के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित करना और निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।


कौन से उत्पाद प्रभावित नहीं होंगे?

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि स्टील, एल्युमिनियम जैसे उत्पाद, जिन पर पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ लागू हैं, इस नए निर्णय से प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा, कुछ ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक और USMCA समझौते के तहत होने वाला व्यापार भी इस अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा गया है।