अमेरिका के नए वीजा नियम: क्या है वीजा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम का असर?
अमेरिका की यात्रा के लिए नए वीजा नियम
नई दिल्ली: अमेरिका की यात्रा करने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने चर्चित 'वीजा बॉन्ड पायलट प्रोग्राम' को स्थायी रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। इस नए नियम के तहत, कुछ देशों के यात्रियों को अमेरिकी वीजा प्राप्त करने से पहले हजारों डॉलर की सुरक्षा बॉन्ड राशि जमा करनी होगी। यह नियम 3 अगस्त से प्रभावी होगा।
इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों के बीच हलचल मचा दी है। स्थायी नियम का दर्जा मिलने का अर्थ है कि भविष्य में कुछ देशों के आवेदकों को वीजा मिलने से पहले एक निश्चित राशि सरकार के पास सुरक्षा बॉंड के रूप में जमा करनी पड़ सकती है।
नए नियमों पर विवाद और आलोचना
कड़े फैसले पर बढ़ा विवाद और आलोचना
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस कठोर निर्णय का मानवाधिकार संगठनों और इमिग्रेशन वकीलों ने विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी धनराशि जमा करने की शर्त आम मध्यमवर्गीय यात्रियों, शोधकर्ताओं और व्यावसायिक आगंतुकों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद करने के समान है। सोशल मीडिया की गहन जांच, लगातार बढ़ती वीजा फीस और अब सुरक्षा बॉंड जैसे कठोर नियमों से उन लोगों के लिए भी यात्रा करना कठिन हो रहा है जो कानूनी और उचित तरीकों से यात्रा करना चाहते हैं।
वीजा बॉंड की राशि
19 लाख रुपये तक का बॉंड
नई नीति के अनुसार, बिजनेस (B-1) और टूरिस्ट (B-2) श्रेणी में वीजा के लिए आवेदन करने वाले यात्रियों से 20,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 19 लाख भारतीय रुपये) तक की जमानत राशि मांगी जा सकती है। अच्छी बात यह है कि भारतीय नागरिकों को फिलहाल इस नियम से बाहर रखा गया है। दक्षिण एशिया में, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान इस दायरे में आ चुके हैं। पहले के ट्रायल में 5,000, 10,000 और 15,000 डॉलर के बॉंड का प्रावधान था, लेकिन अब सबसे कम विकल्प को समाप्त कर दिया गया है और न्यूनतम तथा अधिकतम सीमा बढ़ा दी गई है।
