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अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव: शी जिनपिंग ने ट्रंप से मुलाकात से पहले दी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण मुलाकात से पहले, दोनों देशों के बीच मतभेद फिर से बढ़ गए हैं। चीन ने अमेरिका के लिए चार 'रेड लाइन' स्पष्ट की हैं, जिनमें ताइवान, मानवाधिकार, विकास मॉडल और विकास का अधिकार शामिल हैं। चीनी राजदूत शे फेंग ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसे झूठे बहाने बनाना बंद करना चाहिए। इस बैठक में व्यापार और टैरिफ जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले चीन का सख्त संदेश क्या है।
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चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते मतभेद


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले, दोनों देशों के बीच मतभेद एक बार फिर से बढ़ गए हैं। जिनपिंग के अमेरिका दौरे से पहले, चीन ने वाशिंगटन के लिए अपनी चार 'रेड लाइन' स्पष्ट कर दी हैं। चीनी राजदूत शे फेंग ने 23 सितंबर को कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र 'पीपुल्स डेली' में एक लेख में यह जानकारी दी।


चीन के चार मुद्दे जिन पर नहीं होगा समझौता

शे फेंग ने कहा कि मतभेदों का समाधान आपसी सम्मान और सद्भाव पर निर्भर करता है। उन्होंने चार ऐसे मुद्दों की पहचान की है जिन पर चीन किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इनमें ताइवान का मुद्दा, लोकतंत्र और मानवाधिकार, चीन का विकास मॉडल और राजनीतिक व्यवस्था, और चीन के विकास का अधिकार शामिल हैं।


अमेरिका को दी गई चेतावनी

शे फेंग ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे चीन को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक असंतुलन और बंधुआ मजदूरी जैसे झूठे बहाने बनाना बंद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब चीन और अमेरिका सहयोग करते हैं, तो दोनों को लाभ होता है, लेकिन टकराव से दोनों को नुकसान उठाना पड़ता है। चीनी राजदूत ने स्पष्ट किया कि चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। चीन शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद करता है कि अमेरिका भी इसी सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगा।


बैठक से पहले चीन का सख्त संदेश

यह ध्यान देने योग्य है कि ताइवान के मामले में चीन का रुख हमेशा से कठोर रहा है। ताइवान सरकार के विरोध के बावजूद, चीन उसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। माना जा रहा है कि ट्रंप और जिनपिंग की बैठक में व्यापार, टैरिफ और ताइवान जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इससे पहले ही, चीन ने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर अमेरिका को एक सख्त संदेश दे दिया है।