अमेरिका ने क्यूबा की तेल कंपनी पर नए प्रतिबंध लगाए, बढ़ा तनाव
क्यूबा पर नए आर्थिक प्रतिबंध
नई दिल्ली: अमेरिका ने क्यूबा की सरकारी तेल और गैस कंपनी पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाकर दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने क्यूबा की सरकारी ऊर्जा कंपनी सीयूपीईटी (CUPET) को प्रतिबंधित कंपनियों की सूची में डाल दिया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि क्यूबा अपनी ऊर्जा संसाधनों का उपयोग जनता के हितों के बजाय अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए कर रहा है।
विदेश मंत्री की घोषणा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार लंबे समय से तेल और ईंधन जैसे संसाधनों का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है। उनके अनुसार, देश में ऊर्जा संकट के बावजूद आम नागरिकों को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
प्रतिबंधों की विस्तृत जानकारी
नए प्रतिबंधों के अनुसार, अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी नागरिकों और संस्थाओं के नियंत्रण में सीयूपीईटी की सभी संपत्तियों और वित्तीय हितों को फ्रीज कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, कंपनी से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोक रहेगी, जब तक कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय से विशेष अनुमति न मिले।
क्यूबा पर आरोप
मार्को रुबियो ने यह भी आरोप लगाया कि क्यूबा के आम लोग ईंधन की कमी और लगातार बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं, जबकि देश के शीर्ष नेता विशेष सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संसाधनों का एक हिस्सा सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी ढांचे को प्राथमिकता देने में लगाया जाता है, जिससे नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
अमेरिका-क्यूबा के बीच तनाव
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी कहा कि कंपनी की कुछ महत्वपूर्ण संपत्तियां अतीत में अमेरिकी मालिकों से अनुचित तरीके से अधिग्रहित की गई थीं। इसके अलावा, वाशिंगटन ने विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी है कि यदि वे प्रतिबंधित संस्थाओं या उनसे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में शामिल पाए गए, तो वे भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। अमेरिका और क्यूबा के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, और अमेरिका पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से क्यूबा पर विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लागू कर रहा है, जिन्हें दुनिया के सबसे लंबे प्रतिबंध कार्यक्रमों में गिना जाता है।
