अमेरिका ने भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जानें इसके प्रभाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारतीय उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी। यह निर्णय कई देशों पर लागू किया गया है, और इसका उद्देश्य जबरन मजदूरी से बने उत्पादों को रोकना है। जानें कि यह निर्णय भारतीय निर्यातकों पर कैसे प्रभाव डालेगा और क्या सभी उत्पाद इससे प्रभावित होंगे।
| Jul 24, 2026, 14:34 IST
अमेरिका का नया टैरिफ निर्णय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से टैरिफ का नया निर्णय लिया है, जिसमें भारत भी शामिल है। अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10% का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसका मतलब है कि जिन सामानों पर पहले से टैरिफ लागू था, अब उन पर अतिरिक्त 10% शुल्क भी लगेगा। अमेरिका का तर्क है कि कई देश जबरन मजदूरी से बने उत्पादों का निर्यात कर रहे हैं, और वह ऐसे उत्पादों को अपने बाजार में नहीं देखना चाहता। इसी संदर्भ में, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने जांच की और पाया कि कई देशों ने जबरन मजदूरी के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। इस आधार पर, अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत सहित 17 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है।
इसका अर्थ क्या है?
इसका अर्थ क्या है?
मान लीजिए, यदि भारत से कोई सामान अमेरिका भेजा जाता है और उस पर पहले से 15% का आयात शुल्क है, तो अब उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ भी लगेगा। इससे अमेरिकी बाजार में वह सामान और महंगा हो जाएगा, जिससे उसकी मांग प्रभावित हो सकती है और भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है। हालांकि, यह जानकर राहत मिलती है कि पहले चर्चा थी कि भारत पर 12.5% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन श्रम मानकों पर बातचीत के बाद यह 10% पर सीमित किया गया है। अमेरिका ने केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया, कनाडा, मेक्सिको, श्रीलंका, ब्रिटेन सहित कुल 17 देशों पर यह टैरिफ लागू किया है। कुछ देशों पर 12.5% का टैरिफ भी लगाया गया है।
क्या सभी भारतीय उत्पादों पर इसका प्रभाव पड़ेगा?
क्या भारत के सभी उत्पादों पर इसका असर होगा?
इसका उत्तर है नहीं। सभी उत्पादों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि स्टील और एल्यूमिनियम जैसे उत्पादों पर पहले से लागू अलग टैरिफ इस निर्णय से प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा, कुछ ऊर्जा उत्पाद और उर्वरक भी इस अतिरिक्त टैरिफ से बाहर रहेंगे। भारत सरकार ने पहले से ही इस निर्णय की संभावना को देखते हुए फोर्स लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान की थी और उनके लिए नए दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन करना और भविष्य में ऐसे कदमों से बचना है। कुल मिलाकर, यह निर्णय भारत के खिलाफ नहीं है, बल्कि अमेरिका चाहता है कि वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने उत्पादों का प्रवेश न हो। यह अमेरिका का एक बहाना हो सकता है, लेकिन यह एक सच्चाई भी है।
