अमेरिका ने भारत पर शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क का आरोप लगाया
भारत पर गंभीर आरोप
अमेरिका ने भारत के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट में भारत को शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है, जिसके माध्यम से चीन के उच्च अमेरिकी टैरिफ वाले सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजार में पहुंचाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों का उपयोग कर चीनी सामान को इस तरह से पुनः रूट किया गया कि इसकी असली उत्पत्ति छिपी रहे और अमेरिकी शुल्क से बचा जा सके।
रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो द्वारा तैयार की गई 'द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम' का उल्लेख है, जिसमें संभावित अवैध ट्रांसशिप का अनुमान लगभग 60 अरब डॉलर लगाया गया है। इस रिपोर्ट का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण अमेरिकी सरकार को टैरिफ से मिलने वाले राजस्व में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क की संरचना
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 40 देश इस शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क में किसी न किसी रूप में शामिल हैं। इन्हें चीनी सामान को कम टैरिफ वाले रास्ते से अमेरिका पहुंचाने में उनकी भूमिका के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। भारत को टियर वन में रखा गया है, जिसमें कनाडा, जापान, यूरोपीय संघ, इजराइल और मेक्सिको जैसे अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार शामिल हैं।
रिपोर्ट में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के हवाले से अनुमान लगाया गया है कि 2025 में चीन से अमेरिका जाने वाला लगभग 67 अरब डॉलर का सामान मेक्सिको, भारत और वियतनाम जैसे प्रमुख हब के माध्यम से ट्रांसपोर्ट किया जाएगा। इससे लगभग 28 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान होने की संभावना है।
ट्रंप प्रशासन की नीतियों का प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2018 में ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए कुछ चीनी उत्पादों पर सेक्शन 301 के तहत टैरिफ लगाए थे। इसके बाद चीनी निर्यातकों ने सामान को सीधे चीन से अमेरिका भेजने के बजाय तीसरे देशों के माध्यम से भेजना शुरू किया।
इन स्थानों पर सीमित असेंबली, फिनिशिंग, रीलेबलिंग या दस्तावेजों में बदलाव के जरिए सामान का मूल देश अलग दिखाने की स्थिति बनाई जा सकती थी। रिपोर्ट में भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई कॉरिडोर का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि इलेक्ट्रिक पंप और कंप्रेसर जैसे चीनी सामान की ट्रांसिपमेंट से इस कॉरिडोर को आर्थिक लाभ हुआ है।
भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्ट जारी होने से छह दिन पहले, अमेरिकी सेनेट ने एक बिल को मंजूरी दी थी जिसमें रूस से तेल, गैस और अन्य निर्यात खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।
इस बिल में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को संभावित निशाने के तौर पर शामिल किया गया है। इसके प्रायोजकों का कहना है कि इसकी दर इतनी ऊंची होनी चाहिए कि चीन और भारत रूसी तेल खरीद न सकें।
