अमेरिका में ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला: बंदूक रखने के अधिकार में बदलाव
नई व्यवस्था का आगाज़
नई दिल्ली: अमेरिका में बंदूक रखने के अधिकार से संबंधित नियमों में ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार से एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत कुछ ऐसे लोग भी अपने हथियार रखने के अधिकार को पुनः प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिनका यह अधिकार आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद छिन गया था। इस नई प्रक्रिया को अमेरिका में सेकंड अमेंडमेंट के समर्थकों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि गैर-हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को भी परिस्थितियों के आधार पर बंदूक रखने का अधिकार पुनः प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए।
अटॉर्नी जनरल का बयान
अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि सेकंड अमेंडमेंट अमेरिकी नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण अधिकार है। उनके अनुसार, सरकार को किसी व्यक्ति को यह अधिकार हमेशा के लिए छीनने का अधिकार नहीं होना चाहिए, जब तक कि यह स्पष्ट न हो कि वह समाज के लिए खतरा है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए योग्य व्यक्तियों के लिए अधिकार पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुलभ बनाना है।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
अमेरिकी कानून के अनुसार, जिन व्यक्तियों का बंदूक रखने का अधिकार अपराध के कारण समाप्त हो गया है, वे सरकार के समक्ष इसे बहाल करने के लिए अपील कर सकते हैं। हालांकि, 1992 से कांग्रेस ने संघीय एजेंसी एटीएफ को ऐसे आवेदनों पर कार्रवाई के लिए आवश्यक धन उपलब्ध नहीं कराया था, जिससे यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से ठप हो गई थी। अब न्याय विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की नई व्यवस्था शुरू की है। विभाग का कहना है कि प्रत्येक आवेदन की अलग-अलग जांच की जाएगी, जिसमें आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड, व्यवहार और समाज के लिए संभावित खतरे को ध्यान में रखा जाएगा।
आवेदन खारिज होने की संभावना
नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि हर आवेदक को बंदूक रखने का अधिकार पुनः मिलेगा। न्याय विभाग के अनुसार, हिंसक अपराधों में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों, पंजीकृत यौन अपराधियों, अमेरिका में अवैध रूप से निवास करने वालों और समाज के लिए खतरा माने जाने वाले अन्य व्यक्तियों के आवेदन सामान्य परिस्थितियों में खारिज किए जाएंगे।
पिछले बदलावों का संदर्भ
ट्रंप प्रशासन के दौरान न्याय विभाग ने इस वर्ष बंदूकों से संबंधित कई नियमों में बदलाव किए हैं। विभाग ने साइलेंसर और कुछ प्रकार की बंदूकों पर प्रतिबंध से संबंधित नियमों को हटाने वाले एक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील न करने का निर्णय भी लिया था। नई व्यवस्था को भी हथियार रखने के अधिकारों में राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
