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अमेरिका में पहली बार 65 साल बाद गोली से दी जाएगी मौत की सजा

अमेरिका में मेजर निदाल मलिक हसन को 65 साल बाद गोली से मौत की सजा दी जाएगी। यह निर्णय 2009 में टेक्सास में हुई गोलीबारी के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लिया गया है। जानें इस ऐतिहासिक घटना के पीछे की कहानी, जिसमें 13 लोगों की हत्या और सैन्य न्याय प्रणाली की जटिलताएँ शामिल हैं। क्या यह सजा समय पर लागू होगी? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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मौत की सजा का नया तरीका

आम तौर पर मौत की सजा फांसी के माध्यम से दी जाती है, लेकिन कुछ देशों में इसे जहरीले इंजेक्शन या गैस चेंबर के जरिए भी अंजाम दिया जाता है। हाल ही में अमेरिका में एक व्यक्ति को गोली मारकर मौत की सजा देने का निर्णय लिया गया है। मेजर निदाल मलिक हसन, जो 13 हत्याओं का दोषी है, को 3 दिसंबर 2026 को गोली मारी जाएगी। यह घटना अमेरिका के इतिहास में 65 वर्षों में पहली बार होगी जब सेना किसी व्यक्ति को मौत की सजा देगी। निदाल मलिक को 2009 में टेक्सास में हुई गोलीबारी के मामले में दोषी ठहराया गया था।


फोर्ट हूड गोलीबारी की घटना

5 नवंबर 2009 को, निदाल मलिक, जो उस समय सेना में मेजर था, ने फोर्ट हूड के एक आर्मी बेस में लेजर पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में एक गर्भवती सैनिक सहित 13 लोगों की जान गई और 32 अन्य घायल हुए। इस घटना के दौरान निदाल मलिक को भी गोली लगी, जिससे उसके कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।


कोर्ट मार्शल और सुनवाई

निदाल मलिक का कोर्ट मार्शल किया गया और उसे सेना से बर्खास्त कर दिया गया। सुनवाई के दौरान, उसने अपने अपराध को स्वीकार किया और कहा कि उसने यह हमला अपने साथी मुसलमानों को अफगानिस्तान भेजने से रोकने के लिए किया।


मौत की सजा में देरी

अमेरिका में मौत की सजा बहुत कम दी जाती है। निदाल मलिक पर 'वर्कप्लेस वायलेंस' का आरोप था, और इस मामले में कई अपीलों के कारण प्रक्रिया लंबी खिंच गई। 2020 में अमेरिकी सेना की अदालत ने मौत की सजा को बरकरार रखा, और 2023 में यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इसे समर्थन दिया। अंततः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सजा को मंजूरी दी।


फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा

जब सजा का दिन आएगा, तो दोषी को एक विशेष चेंबर में ले जाया जाएगा, जहां उसे एक कुर्सी पर बांध दिया जाएगा। उसके सीने पर निशाना लगाया जाएगा, और एक फायरिंग स्क्वाड, जिसमें 3 से 5 लोग शामिल होंगे, उसे गोली मारेंगे। इस प्रक्रिया में एक राइफल में गोली नहीं होती, ताकि गोली चलाने वाले को यह संदेह रहे कि किसकी गोली से मौत हुई।