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अमेरिका में भारतीय निर्यात की स्थिति: टैरिफ के बावजूद मजबूत बनी हुई है मांग

अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर टैरिफ बढ़ाने के बावजूद, भारतीय उत्पादों की मांग में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच अमेरिका को भारत का गुड्स एक्सपोर्ट थोड़ा घटा, लेकिन अमेरिका का बाजार अभी भी भारत के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। लगभग 45 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ का असर नहीं पड़ा है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में वृद्धि देखी गई है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भारत को मिल रहे लाभ के बारे में।
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अमेरिका में भारतीय सामान की स्थिति


नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने के बावजूद, भारतीय सामान की मांग अमेरिकी बाजार में स्थिर बनी हुई है। जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच भारत का गुड्स एक्सपोर्ट अमेरिका में लगभग 2 प्रतिशत घटा, लेकिन फिर भी कुल भारतीय निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि टैरिफ का प्रभाव तो पड़ा है, लेकिन भारतीय उत्पादों की मांग में कोई बड़ी कमी नहीं आई है।


45% निर्यात पर टैरिफ का असर कम

भारत के निर्यात पर नए 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का प्रभाव सभी उत्पादों पर समान नहीं है। सरकार के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत भारतीय निर्यात इस अतिरिक्त शुल्क से मुक्त है, जिसमें जेनेरिक दवाएं और स्मार्टफोन जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद शामिल हैं। वहीं, स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स पर पहले से लागू Section 232 के शुल्क के कारण नए टैरिफ का असर नहीं पड़ा। हालांकि, शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का दबाव बना हुआ है।


इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा का प्रदर्शन

टैरिफ के बावजूद, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेनेरिक फार्मास्युटिकल्स जैसे क्षेत्रों का प्रदर्शन भारत के लिए सकारात्मक रहा है। जून 2026 में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में सालाना आधार पर लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, टेक्सटाइल, गारमेंट्स और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों को अधिक दबाव का सामना करना पड़ा है।


चीन से दूरी का लाभ

अमेरिकी कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे भारत को वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई बेस के रूप में लाभ मिल रहा है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन तुरंत भारत में स्थानांतरित हो गया है। टैरिफ बढ़ने के बाद, भारतीय निर्यातकों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है और ऐसे उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया है जिन पर शुल्क का प्रभाव कम है। इसके अलावा, अमेरिका में पहले से मजबूत मांग वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और इंजीनियरिंग उत्पादों ने निर्यात को सहारा दिया है।


अमेरिका का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट बाजार

हालांकि वर्तमान स्थिति राहत देने वाली है, लेकिन 55 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से टेक्सटाइल और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इसके बावजूद, अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट बाजार बना हुआ है।