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अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती धमकियाँ: क्या ट्रंप का नया प्लान है?

हाल ही में अमेरिका में भारतीयों को दी गई धमकियाँ चर्चा का विषय बन गई हैं। पीएम मोदी के मित्र अमेरिका ने 'मिस्टर सिंह' को चेतावनी दी है कि वे देश छोड़ दें, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बीच, भारतीय मूल के दंपती ने अमेरिका की एक विश्वविद्यालय को 20 मिलियन डॉलर का दान दिया है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने इस मामले में नस्लवाद का आरोप लगाया है। जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई और क्या ट्रंप का कोई नया प्लान है।
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अमेरिका की धमकी: भारतीयों के लिए खतरा?

अमेरिका ने भारतीयों को चेतावनी दी है कि 'मिस्टर सिंह, अमेरिका छोड़ दो, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।' क्या यह धमकी केवल भारतीयों के लिए है? प्रधानमंत्री मोदी जिस अमेरिका को अपना मित्र मानते हैं, क्या वह अब भारतीयों को निशाना बना रहा है?


क्या ट्रंप भारतीयों को अमेरिका से बाहर निकालने की योजना बना रहे हैं? ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विशेष रूप से भारतीयों को लक्षित किया है। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें एक भारतीय मूल के व्यक्ति को 'मिस्टर सिंह' कहकर अमेरिका छोड़ने की चेतावनी दी गई। पोस्ट में लिखा गया था, 'सेल्फ डिपोर्ट और फाइंड आउट', यानी खुद अमेरिका छोड़ दो, वरना गंभीर परिणाम भुगतो। इसके अलावा, पोस्ट में यह भी कहा गया कि 'गेट ऑफ आवर रोड्स यू डोंट नो हाउ टू ड्राइव मिस्टर सिंह', यानी 'मिस्टर सिंह, हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलानी नहीं आती।' इसके बाद, डीएचएस ने एक वीडियो भी साझा किया।


भारतीय दंपती का बड़ा योगदान

अनुराधा और विकास सिन्हा, भारतीय मूल के दंपती, ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ टेक्सस को 20 मिलियन डॉलर का दान दिया है। उनके सम्मान में, विश्वविद्यालय नया 'अनुराधा एड विकास सिन्हा कॉलेज ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड एडवांस्ड एनालिटिक्स' स्थापित करेगा। दोनों ने भारत में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका आए। विकास ब्रॉडकॉम में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं।


नस्लवाद का आरोप

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) ने डीएचएस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'सिंह' उपनाम का उपयोग करके भारतीयों और सिखों को निशाना बनाया है। संगठन का कहना है कि 'सिंह' केवल सिखों का उपनाम नहीं है, बल्कि यह बड़ी संख्या में भारतीयों का भी है, और अमेरिका में सिख उपनाम वाले लोग अमेरिकी समाज का हिस्सा हैं। एचएएफ ने इस पोस्ट को नस्लवादी और अमेरिका विरोधी करार दिया है और इसकी जांच की मांग की है। सिख कोलेशन ने भी इस पोस्ट की आलोचना की है।