अमेरिका में हनुमान की प्रतिमा पर विवाद: भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती चिंताएं
राजनीतिक विवाद का नया मोड़
नई दिल्ली: अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों के चलते भारतीय-अमेरिकी समुदाय और उनकी धार्मिक आस्था अचानक चर्चा का विषय बन गई है। चुनाव प्रचार के दौरान हिंदू विरोधी टिप्पणियों और नस्लभेदी बयानों ने अमेरिकी राजनीति में नया विवाद उत्पन्न कर दिया है। यह मामला तब और बढ़ गया जब टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा को हटाने की धमकी दी गई। इस घटना ने पूरे देश में हिंदू-अमेरिकी समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
हनुमान की प्रतिमा पर विवाद
इस विवाद की जड़ टेक्सास के शुगर लैंड में स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित 'स्टैच्यू ऑफ यूनियन' नामक हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है। अगस्त 2024 में इसकी प्राण-प्रतिष्ठा के समय से ही कुछ रूढ़िवादी तत्व इसका विरोध कर रहे थे।
'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (MAGA) अभियान से जुड़े कार्यकर्ता और यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर मूर्ति की तस्वीर साझा करते हुए इसे गिराने की धमकी दी।
Btw, when we win, we are tearing this down. pic.twitter.com/KnDOnuAGP5
— Jesse Hughes ✝️🇺🇸 (@JesseHughesNC) September 20, 2026
नस्लभेदी टिप्पणियों का विरोध
ह्यूजेस की इस विवादास्पद टिप्पणी के बाद, अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इसे देशद्रोही और हिंदू धर्म के लिए खतरा बताया। बख्शी ने कहा कि किसी धार्मिक स्थल को नफरत के आधार पर निशाना बनाना अमेरिका के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, जिनकी रक्षा के लिए उन्होंने सेना में सेवा की। उनके इस रुख का समर्थन नॉर्थ अमेरिका के हिंदू संगठनों (CoHNA) और अन्य पूर्व सैनिकों ने किया है।
टेक्सास में नस्लभेदी बयानों की बढ़ती संख्या
टेक्सास लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ रहा है, जहां भारतीय-अमेरिकियों की संख्या पांच लाख से अधिक है। राज्य में गवर्नर पद से लेकर विधानमंडल के दोनों सदनों पर रूढ़िवादी पार्टी का नियंत्रण है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव के बाद से यहां प्रवासियों और गैर-ईसाई समुदायों के खिलाफ बयानबाजी में तेजी आई है। हाल ही में, टेक्सास रेलरोड कमिश्नर के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों पर आपत्तिजनक नस्ली टिप्पणी की। हालांकि, रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्निन और डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने इस तरह की असहिष्णुता की निंदा की है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, धार्मिक आस्था और नस्लभेदी मुद्दे अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण का कारण बनते जा रहे हैं।
