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अमेरिकी DHS का नया विवाद: 'सिंह' उपनाम पर नस्लवादी विज्ञापन का आरोप

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने हाल ही में एक विवादास्पद विज्ञापन जारी किया है, जिसमें 'सिंह' उपनाम का उपयोग करने वाले भारतीय समुदाय को निशाना बनाया गया है। इस विज्ञापन में ट्रान्सफॉर्मर्स के पात्रों का इस्तेमाल किया गया है, जिसे नस्लवादी करार दिया गया है। भारतीय और सिख संगठनों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, और इसे नस्लीय भेदभाव का उदाहरण बताया है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और संगठनों की मांगें क्या हैं।
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नई दिल्ली में उठी आवाज़ें


नई दिल्ली: अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए प्रेरित करने के अपने प्रयासों के तहत, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) एक नए विवाद में फंस गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी एक डिजिटल विज्ञापन में, प्रसिद्ध फिल्म 'ट्रान्सफॉर्मर्स' के पात्रों का उपयोग करते हुए एक संदेश साझा किया गया है, जिसे भारतीय समुदाय और अधिकार संगठनों ने नस्लवादी करार दिया है। अमेरिका में 'सिंह' उपनाम का उपयोग हिंदू और सिख दोनों समुदायों के लोग करते हैं, जो लॉजिस्टिक्स और ट्रक ड्राइविंग के क्षेत्र में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं।


विज्ञापन में 'मिस्टर सिंह' पर निशाना

रोबोट के पोस्टर में 'मिस्टर सिंह' पर साधा निशाना


डिजिटल पोस्टर में ट्रान्सफॉर्मर्स के मुख्य पात्र ऑप्टिमस प्राइम को DHS का पैच पहने एक भूरे दाढ़ी-मूंछ वाले व्यक्ति के सामने खड़ा दिखाया गया है। पोस्टर पर लिखा गया है, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता, मिस्टर सिंह।'


नए विज्ञापन पर विवाद

नए पोस्टर पर बवाल


यह विज्ञापन ट्रंप प्रशासन के उस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसमें अवैध रूप से रह रहे लोगों को अपनी इच्छा से देश छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। इसके साथ ही विभाग ने 'सेल्फ-डिपोर्ट या अंजाम भुगतो' जैसे नारों का भी उपयोग किया है।



AI वीडियो में प्रवासियों को 'एलियन' कहा गया

AI वीडियो में प्रवासियों को बताया 'एलियन'


पोस्टर के अलावा, DHS ने AI द्वारा निर्मित एक छोटा वीडियो भी साझा किया है। इस वीडियो में ट्रान्सफॉर्मर्स के खलनायक 'मेगाट्रॉन' को अमेरिका में बंद विदेशी नागरिकों (जिन्हें प्रशासनिक भाषा में 'एलियन' कहा गया है) की रिहाई की बातचीत करते हुए दिखाया गया है। वीडियो में हरजिंदर सिंह, राजविंदर कुमार, बेकझान बेइशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह जैसे ट्रक चालकों का उल्लेख किया गया है, जिन पर सड़क दुर्घटनाओं या अन्य मामलों के आरोप हैं। विभाग ने कहा कि यदि कोई शत्रुतापूर्ण इरादे से देश में आएगा, तो अमेरिकी अपनी सीमाओं और स्वाभिमान की रक्षा करेंगे।


भारतीय और सिख संगठनों की प्रतिक्रिया

भारतीय और सिख संगठनों में भारी रोष


अमेरिका में 'सिंह' उपनाम का उपयोग हिंदू और सिख दोनों समुदायों के लोग करते हैं, जो लॉजिस्टिक्स और ट्रक ड्राइविंग के क्षेत्र में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। नागरिक अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि यह संदेश केवल अवैध प्रवासियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में रहने वाले पूरे भारतीय मूल के लोगों को नस्लीय रूप से निशाना बनाता है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने इस पोस्टर को सरकारी एजेंसी द्वारा किया गया नस्लीय और भेदभावपूर्ण व्यवहार बताया है। संगठन ने अमेरिकी न्याय विभाग और FBI से इस मामले की जांच की मांग की है। वहीं, सिख कोएलिशन ने कहा कि 9/11 के हमले के 25 साल बाद भी सिख समुदाय को उनके पहनावे और रूप-रंग के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है। संस्था ने स्पष्ट किया कि लाखों अमेरिकी सिखों के नाम में जुड़ा 'सिंह' शब्द शेर का प्रतीक है और वे ऐसे सरकारी संदेशों से डरने वाले नहीं हैं।