अमेरिकी नौसेना का अनोखा रेस्क्यू: समुद्री ड्रोन से बचाए गए पायलट
अमेरिकी नौसेना का अद्वितीय रेस्क्यू ऑपरेशन
नई दिल्ली: मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना ने एक विशेष रेस्क्यू मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने पहली बार एक मानव रहित समुद्री ड्रोन का उपयोग करते हुए हेलीकॉप्टर के दो सदस्यों को सुरक्षित निकाला।
सैरोनिक कॉर्सियर का उपयोग
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में अमेरिकी नौसेना ने 'सैरोनिक कॉर्सियर' नामक एक उन्नत समुद्री ड्रोन का सहारा लिया। यह लगभग 24 फीट लंबा एक स्वायत्त समुद्री जहाज है, जो बिना किसी मानव चालक के कार्य करता है।
इतिहास में पहली बार
यह अमेरिकी सेना के इतिहास में पहली बार है जब किसी मानव रहित समुद्री जहाज को सीधे रेस्क्यू मिशन में शामिल किया गया। पहले, ऐसे ड्रोन मुख्यतः निगरानी, जासूसी और समुद्री सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते थे। अमेरिकी रक्षा विभाग ने लंबे समय से ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने का प्रयास किया है ताकि सैनिकों के जोखिम को कम किया जा सके और त्वरित कार्रवाई की जा सके।
टास्क फोर्स 59 की भूमिका
अमेरिकी नौसेना ने 2021 में 'टास्क फोर्स 59' नामक एक विशेष इकाई का गठन किया था, जिसका मुख्यालय बहरीन में है। यह यूनिट पूरी तरह से मानव रहित सिस्टम और उन्नत ड्रोन तकनीक पर केंद्रित है। मार्च के अंत में, इसी यूनिट ने मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में कॉर्सियर ड्रोन की तैनाती शुरू की थी।
ड्रोन का बढ़ता उपयोग
इन समुद्री ड्रोन का उपयोग दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, समुद्री सुरंगों का पता लगाने और निगरानी मिशनों में किया जाता है। अब इन्हें युद्ध के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पेंटागन का मानना है कि कम लागत वाले ये ड्रोन भविष्य में सैन्य रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। अमेरिका आने वाले समय में सैकड़ों से लेकर हजारों समुद्री ड्रोन तैनात करने की योजना बना रहा है।
यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की प्रभावशीलता
समुद्री ड्रोन की क्षमता को दुनिया ने यूक्रेन-रूस युद्ध में भी देखा है, जहां यूक्रेन ने इन ड्रोन की मदद से रूस के कई युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाया। यह स्पष्ट है कि भविष्य की लड़ाइयों में मानव रहित तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।
