अमेरिकी नौसेना की नई हाइपरसोनिक मिसाइल ब्लैकबीयर्ड: क्या है इसकी खासियत?
अमेरिकी नौसेना का नया परीक्षण
नई दिल्ली: अमेरिकी नौसेना ने अपनी नवीनतम हाइपरसोनिक मिसाइल, ब्लैकबीयर्ड, का पहला उड़ान परीक्षण वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में यह घातक मिसाइल F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान के पंख के नीचे दिखाई दे रही है। इसे कैस्टेलियन कंपनी द्वारा नौसेना के MACE प्रोग्राम के तहत विकसित किया जा रहा है।
ब्लैकबीयर्ड की विशेषताएँ
क्या है ब्लैकबीयर्ड की ताकत
ब्लैकबीयर्ड की गति मैक-5 से अधिक है, जो आवाज की गति से पांच गुना तेज है। इसकी मारक क्षमता 800 किलोमीटर तक है, जो इसे समुद्र में जहाजों पर हमले के लिए अत्यंत खतरनाक बनाती है। यह लगभग 34 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी कीमत भी खास है; पारंपरिक हाइपरसोनिक हथियारों की तुलना में, इसकी लागत केवल 3 लाख डॉलर (लगभग 2.88 करोड़ रुपये) है।
सस्ती और बड़े पैमाने पर उत्पादन
सस्ती और बड़े पैमाने पर बनने वाली मिसाइल
नौसेना का उद्देश्य इसे सस्ते और तेजी से बड़े पैमाने पर बनाना है। हर साल 500 मिसाइलों का उत्पादन करने का लक्ष्य है। कंपनी ने पहले ही कई सफल परीक्षण किए हैं। इस प्रोजेक्ट का नाम मल्टी-मिशन अफोर्डेबल कैपेसिटी इफेक्टर (MACE) है, जिसका उद्देश्य कम लागत में प्रभावी हाइपरसोनिक क्षमताएँ हासिल करना है। प्रारंभिक उत्पादन आदेश दिए जा चुके हैं और F/A-18 पर इसके इंटीग्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
2028 तक तैनाती की योजना
2028 तक तैनाती की तैयारी
अमेरिकी नौसेना 2028 तक इसे सीमित संख्या में तैनात करने की योजना बना रही है। वर्तमान में परीक्षण सुपर हॉर्नेट पर चल रहा है, लेकिन भविष्य में इसे F-35 फाइटर जेट में भी शामिल किया जाएगा। F-35 अपने आंतरिक हथियार बे में चार ब्लैकबीयर्ड मिसाइलें ले जा सकेगा, जिससे इसकी स्टील्थ क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, इसे अमेरिकी सेना के HIMARS सिस्टम और अन्य समुद्री प्लेटफार्मों पर भी परीक्षण करने की योजना है।
यह मिसाइल कैरियर आधारित एयर विंग्स को लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी, जिससे फाइटर जेट दुश्मन की रेंज में जाए बिना ही हमला कर सकेंगे। हाइपरसोनिक होने के कारण, इसे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा रोकना लगभग असंभव होगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच, यह मिसाइल अमेरिका के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकती है। इसकी सस्ती कीमत और बड़े पैमाने पर तैनाती से अमेरिका को समुद्री युद्ध में महत्वपूर्ण बढ़त मिलने की उम्मीद है।
