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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: ट्रंप के लिए चुनौती और भारत पर प्रभाव

3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकते हैं। इन चुनावों के परिणाम न केवल ट्रंप के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेंगे, बल्कि भारत जैसे देशों पर भी उनके प्रभाव को दर्शाएंगे। राष्ट्रपति की गिरती अप्रूवल रेटिंग और डेमोक्रेट्स की मजबूत दावेदारी चुनावी परिदृश्य को बदल सकती है। जानें कि ये चुनाव कैसे वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
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मध्यावधि चुनाव की तैयारी

3 नवंबर को, अमेरिकी नागरिक 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' और 'सीनेट' के लिए मतदान करेंगे। ये चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, और इसके परिणाम भारत जैसे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावित कर सकते हैं। राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग, जो उनके कार्यभार संभालने के समय 47% थी, अब घटकर लगभग 37% पर आ गई है। कुछ सर्वेक्षणों में यह आंकड़ा 33% से 34% के बीच पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और ईरान युद्ध के प्रति बढ़ता असंतोष है। अनुमानों के अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी 'हाउस' में अपनी स्थिति खो सकती है, जबकि डेमोक्रेट्स ने सीनेट में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है।


नई कांग्रेस का प्रभाव

अमेरिकी थिंक टैंक 'काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस' के जेम्स लिंडसे के अनुसार, मध्यावधि चुनाव शायद ही कभी अमेरिकी रणनीति की दिशा को बदलते हैं। 2006 में, इराक युद्ध के खिलाफ मतदाताओं के असंतोष का लाभ उठाते हुए डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन्स से हाउस और सीनेट दोनों पर नियंत्रण वापस ले लिया था। उस समय, राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने युद्ध में अमेरिकी भागीदारी पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया। लिंडसे का कहना है कि जब राष्ट्रपति को विधायी सहमति की आवश्यकता होती है, तो कांग्रेस पर नियंत्रण रखने वाली पार्टी के पास दबाव बनाने की शक्ति होती है। हालांकि, ईरान युद्ध या वैश्विक टैरिफ के मामलों में ट्रंप को ऐसी सहमति की आवश्यकता नहीं पड़ी।


ईरान युद्ध और डेमोक्रेट्स की रणनीति

यह युद्ध अमेरिकी मतदाताओं के बीच बेहद अलोकप्रिय हो गया है, जिससे इसे रोकना डेमोक्रेट्स के विधायी एजेंडे में प्राथमिकता बन गया है। डेमोक्रेटिक सांसदों ने युद्ध के लिए नए फंड पर रोक लगाने के प्रस्ताव पेश किए हैं, लेकिन इन्हें सीनेट से भी पास होना होगा। ट्रंप इन पर वीटो लगा सकते हैं। फिर भी, डेमोक्रेट्स का नियंत्रण वाला हाउस ट्रंप और उनकी टीम के लिए चुनौतियाँ पैदा कर सकता है। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह युद्ध डेमोक्रेट्स के बीच लोकप्रिय नहीं है, और इसके खिलाफ सुनवाई की संभावना है।


पाकिस्तान के साथ संबंध

ट्रंप प्रशासन के पाकिस्तान के साथ संबंधों में सुधार को लेकर नई दिल्ली में चिंता व्यक्त की गई है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के परिवार का क्रिप्टो कारोबार में विस्तार करना 'हितों के टकराव' का मामला है। 2025 में, पाकिस्तान सरकार ने 'वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल' के साथ एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर किए, जो ट्रंप परिवार द्वारा समर्थित एक क्रिप्टो फर्म है। इसके अलावा, न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के स्वामित्व वाले रूजवेल्ट होटल के पुनर्विकास के लिए ट्रंप के विशेष दूत की मदद से एक समझौता ज्ञापन पर बातचीत की गई।