अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का नया टैरिफ: जेनेरिक दवाओं पर भारी शुल्क का ऐलान
नई नीति का ऐलान
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आयातित जेनेरिक दवाओं पर क्रमिक रूप से उच्च टैरिफ लगाने की योजना का खुलासा किया है। इस नई नीति के अनुसार, पहले दो वर्षों में इन दवाओं पर कोई शुल्क नहीं होगा, लेकिन इसके बाद टैरिफ में तेजी से वृद्धि की जाएगी। ट्रंप का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिका में दवा निर्माण को बढ़ावा देना और घरेलू फार्मास्युटिकल उद्योग को सशक्त करना है।
योजना की शुरुआत कब होगी
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जानकारी दी कि यह योजना 1 अगस्त 2026 से लागू होगी। इस योजना के तहत अगस्त 2026 से 2028 तक अमेरिका में आयातित सभी जेनेरिक दवाओं पर शून्य प्रतिशत टैरिफ रहेगा। इसके बाद तीसरे वर्ष में टैरिफ को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है, और अगले चरण में इसे 200 प्रतिशत तक ले जाने का विचार है।
कौन सी दवाएं प्रभावित होंगी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जो कंपनियां निर्धारित समय सीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा नहीं विकसित करेंगी, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह नीति केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगी, जबकि पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं के लिए मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
भारत पर प्रभाव
इस घोषणा का सबसे बड़ा प्रभाव भारत पर पड़ने की संभावना है। भारत को 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' कहा जाता है, और अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है। अमेरिका में उपयोग होने वाली लगभग 40 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं।
'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को लगभग 9.7 अरब डॉलर की फार्मास्युटिकल दवाओं का निर्यात किया था, जो भारत के कुल 25.8 अरब डॉलर के वैश्विक फार्मा निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत है। हालांकि, इस नई नीति का वास्तविक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में हुए व्यापार समझौते में जेनेरिक दवाओं और फार्मास्युटिकल मुद्दों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने पर सहमति बनी थी।
टैरिफ का संभावित असर
भारतीय कंपनियां ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर, डिप्रेशन, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सस्ती जेनेरिक दवाओं की प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2024 में अमेरिका में गर्भनिरोधक गोलियों के लगभग 65 प्रतिशत प्रिस्क्रिप्शन भारत की प्रमुख दवा कंपनियों ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स और ल्यूपिन द्वारा निर्मित दवाओं से पूरे किए गए थे। यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होता है, तो यह भारतीय दवा उद्योग और अमेरिकी उपभोक्ताओं की दवा लागत पर प्रभाव डाल सकता है।
