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अमेरिकी हाउस ने रूस पर नए प्रतिबंधों का विधेयक पारित किया: क्या होगा भारत और चीन पर असर?

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंधों से संबंधित विधेयक को पारित किया है, जो राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन, जो रूस के बड़े खरीदार हैं, इस विधेयक से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, कुछ देशों को राहत भी मिल सकती है। जानें इस विधेयक के प्रभाव और आगे की स्थिति के बारे में।
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अमेरिकी हाउस का नया विधेयक


नई दिल्ली: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर नए प्रतिबंधों से संबंधित एक विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का नाम है 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026', जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, इसका तात्पर्य यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% शुल्क लागू हो जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह विधेयक कानून का रूप लेगा। इस विधेयक के पक्ष में 262 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 159 ने इसका विरोध किया। इससे पहले, अमेरिकी सीनेट ने इसे 7 अगस्त को 86-11 के अंतर से मंजूरी दी थी। कानून बनने के बाद टैरिफ लगाने का निर्णय राष्ट्रपति करेंगे।


भारत और चीन पर संभावित प्रभाव

यह विधेयक रूस से ऊर्जा खरीद से संबंधित है। भारत और चीन, रूस के कच्चे तेल के बड़े खरीदार माने जाते हैं। इसलिए, इन दोनों देशों के लिए अमेरिका के साथ व्यापार पर अतिरिक्त शुल्क का खतरा उत्पन्न हो सकता है। विधेयक में रूस के तेल या प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान है। इसके साथ ही, रूसी अधिकारियों, व्यवसायों, बैंकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। रूस के 'शैडो फ्लीट', यानी प्रतिबंधों से बचकर तेल पहुंचाने वाले जहाजों को भी निशाना बनाया गया है। इसके अलावा, ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था भी इस विधेयक में शामिल है।


कुछ देशों को मिल सकती है राहत

विधेयक में कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी है। जिन देशों की रूस से प्राकृतिक गैस खरीद आयात का 15 प्रतिशत से कम है और जो निर्भरता कम करने के ठोस कदम उठा रहे हैं, उन्हें राहत मिल सकती है। वर्तमान में, भारत पर 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ है। हाउस की मंजूरी के बाद, अगला कदम राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर का है। इसके बाद यह कानून प्रभावी होगा और यह तय होगा कि किन देशों पर और किस दर से शुल्क लगाया जाएगा। इस समय, आगे की स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा।