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आर्कटिक व्यापार में भारत और चीन की बढ़ती भागीदारी: पुतिन का बयान

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्कटिक क्षेत्र में भारत और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि रूस हमेशा अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करेगा। पुतिन ने नाटो के विस्तार को लेकर चेतावनी दी और यूरोपीय संघ के खिलाफ कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, आर्कटिक व्यापार में नए समीकरण उभर रहे हैं।
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नई दिल्ली में पुतिन का बयान


नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति में उथल-पुथल और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद, आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री व्यापार का नया समीकरण उभर रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पैसिफिक फ्लीट के कर्मियों को संबोधित करते हुए बताया कि भारत और चीन जैसे प्रमुख सहयोगी देश उत्तरी समुद्री मार्ग के विकास में रुचि दिखा रहे हैं। यह टिप्पणी उस समय आई है जब यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। पुतिन ने यूरोपीय संघ द्वारा रूसी मर्चेंट जहाजों और 'शैडो फ्लीट' पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों की आलोचना की।


वैश्विक व्यापार के संदर्भ में

वैश्विक व्यापार


पुतिन ने स्पष्ट किया कि मॉस्को हमेशा अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन करते हुए इस रणनीतिक मार्ग के फायदों को साझा करने के लिए तत्पर है। नॉर्दर्न सी रूट, स्वेज नहर और पारंपरिक समुद्री मार्गों की तुलना में, एशिया और यूरोप के बीच यात्रा के समय और दूरी को काफी कम कर देता है। यही कारण है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए इस आर्कटिक मार्ग के विकास में रूस के साथ संवाद बनाए रखता है।


नाटो को चेतावनी

नाटो को चेतावनी


पुतिन ने मिसाइल क्रूजर 'वार्याग' पर संवाद के दौरान बाहरी ताकतों की गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि नाटो के विस्तार और पश्चिमी हस्तक्षेप के कारण आर्कटिक क्षेत्र में एक 'कृत्रिम तनाव' उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन या क्षेत्रीय संप्रभुता को चुनौती देने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।


यूरोपीय संघ के रुख पर प्रतिक्रिया

यूरोपीय संघ के रुख पर तीखा प्रहार


पुतिन ने यूरोपीय संघ द्वारा रूसी मर्चेंट जहाजों और 'शैडो फ्लीट' पर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूरोपीय देश खुले समुद्र में रूसी व्यापारिक जहाजों को जब्त करते हैं, तो इसे 'समुद्री डकैती' माना जाएगा। रूस का जवाब केवल उसी समुद्री क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, जहाँ जहाजों को रोका जाएगा, बल्कि मॉस्को अपनी सुविधानुसार कहीं भी कड़ा जवाब देने के लिए स्वतंत्र रहेगा। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जबकि यूरोप के साथ रूस का टकराव बढ़ रहा है, वहीं भारत जैसे साझेदार देशों के साथ व्यापारिक और समुद्री सहयोग मजबूत हो रहा है।