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इजराइल के चुनाव: फलस्तीनी नागरिकों की दुविधा और राजनीतिक परिदृश्य

इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव फलस्तीनी नागरिकों के लिए एक गंभीर दुविधा प्रस्तुत करते हैं। मतदान करने या इससे दूर रहने के बीच, फलस्तीनी नागरिकों को अपनी आवाज को दबाने वाली व्यवस्था को वैधता देने का डर है। इस लेख में, हम चुनावों के पीछे की राजनीतिक चुनौतियों, नागरिकता के मुद्दों और आगामी चुनावों में अरब दलों की भूमिका पर चर्चा करेंगे। क्या फलस्तीनी नागरिक अपनी राजनीतिक भागीदारी को बढ़ा पाएंगे? जानने के लिए पढ़ें।
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इजराइल में चुनाव और फलस्तीनी नागरिकों की स्थिति

(तमीर सोरेक, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी) न्यूयॉर्क, 22 अक्टूबर - इजराइल में चुनाव आमतौर पर मतदाताओं के लिए विकल्प चुनने का अवसर प्रदान करते हैं। लेकिन इजराइल के फलस्तीनी नागरिकों के लिए, ये चुनाव एक गंभीर दुविधा का सामना कराते हैं। 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में, फलस्तीनी नागरिकों को मतदान करने या इससे दूर रहने का निर्णय लेना है। देश में मतदान के योग्य लोगों में लगभग एक-छठा हिस्सा फलस्तीनी नागरिकों का है, और उनके वोट नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, कई फलस्तीनी नागरिकों का मानना है कि मतदान करने से एक ऐसी व्यवस्था को वैधता मिल सकती है, जो उनकी आवाज को दबाती है और उनकी नागरिकता को शर्तों के अधीन मानती है। 2022 के पिछले आम चुनाव के बाद गाजा में हुई तबाही, लोगों की हत्या, अभिव्यक्ति पर पाबंदियां और प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा अरब राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन से इनकार ने इस दुविधा को और बढ़ा दिया है।


नागरिकता और सुरक्षा

इजराइल के लगभग एक करोड़ नागरिकों में करीब 17 लाख फलस्तीनी हैं, जिनमें से अधिकांश उन अरब लोगों के वंशज हैं, जो उस भूमि पर रह गए थे, जो बाद में इजराइल का हिस्सा बनी। 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के दौरान लगभग 750,000 फलस्तीनी अपने घरों से बेघर हो गए थे और उनमें से अधिकांश को लौटने की अनुमति नहीं दी गई। 8 नवंबर 1948 को युद्ध के दौरान की गई जनगणना ने यह तय किया कि नए राज्य में किसे शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में अनुपस्थित लोगों को पंजीकरण और नागरिकता से बाहर रखा गया। इससे विस्थापित फलस्तीनियों के लिए नागरिकता प्राप्त करना और अपने घर लौटना लगभग असंभव हो गया। जो फलस्तीनी इजराइल में रह गए, उनके लिए नागरिकता सुरक्षा का एक साधन बनी, लेकिन यह भेदभाव और दमन से पूरी तरह से बचाने में सफल नहीं रही।


राजनीतिक प्रभाव और चुनौतियाँ

जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच इजराइल, गाजा और कब्जे वाले पश्चिमी तट में फलस्तीनियों की हिस्सेदारी लगभग आधी है, लेकिन उनमें से एक-तिहाई से भी कम के पास इजराइली नागरिकता है। नागरिकता रखने वाले फलस्तीनी इजराइल के कुल नागरिकों का लगभग 17 प्रतिशत हैं। इजराइल की स्थापना के बाद से फलस्तीनी नागरिकों को मतदान का अधिकार मिला है, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी में कई बाधाएँ हैं। 1970 के दशक से फलस्तीनी संघर्ष के कारण नेताओं के जुड़ाव के आधार पर उम्मीदवारों और दलों को चुनाव से बाहर करने की कोशिशें हुई हैं, हालांकि उच्चतम न्यायालय ने आमतौर पर ऐसे प्रयासों को रोका है।


राजनीतिक दायरे में संकुचन

सितंबर में इजराइल के केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने अरब दलों के दो गठबंधनों—जॉइंट लिस्ट और यूनाइटेड अरब लिस्ट—को अयोग्य ठहराने की कोशिश की। 2022 के चुनाव में इन गठबंधनों ने अरब बहुल क्षेत्रों में लगभग 86 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे। उच्चतम न्यायालय ने इन गठबंधनों को चुनाव से बाहर करने के निर्णय को पलट दिया। हालांकि, नेशनल डेमोक्रेटिक असेंबली के नेता सामी अबू शहादेह को अयोग्य ठहराने के मामले में अदालत ने संकेत दिया कि उनके खिलाफ फैसला दिया जा सकता है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों के बाद उनके लेख को आलोचकों ने इजराइली नागरिकों के नरसंहार का समर्थन माना।


मतदान से दूरी और भागीदारी की चुनौतियाँ

मतदान से दूर रहने पर फलस्तीनी नागरिक संगठित अपराध और अरब समुदायों में बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों पर कार्रवाई का अवसर खो सकते हैं। लेखक के अनुसार, नेतन्याहू और अधिकांश विपक्षी दलों की फलस्तीनियों के अधिकारों और आत्मनिर्णय को लेकर नीतियों में बहुत कम अंतर है। न तो सत्तारूढ़ गठबंधन और न ही प्रमुख विपक्षी दल दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करते हैं। अरब समुदायों में आपराधिक संगठनों की हिंसा भी एक बड़ी चिंता है। एक सर्वेक्षण में आधे से अधिक अरब उत्तरदाताओं ने अपने समुदायों में हिंसा को अपनी मनोदशा पर नकारात्मक असर डालने वाला प्रमुख कारण बताया।


आगामी चुनाव और अरब दलों की भूमिका

चुनाव में ‘यूनाइटेड अरब लिस्ट’ इजराइल की शासन व्यवस्था में भागीदारी को प्राथमिकता देती है, जबकि ‘जॉइंट लिस्ट’ समान अधिकारों के साथ फलस्तीनी राष्ट्रीय पहचान और एकजुटता बनाए रखने की पक्षधर है। अनुमान है कि 35 से 45 प्रतिशत अरब मतदाता मतदान नहीं करेंगे, जबकि यहूदी मतदाताओं में यह अनुपात 25 से 30 प्रतिशत रह सकता है। अरब दलों के नेता 70 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रख रहे हैं। अधिक मतदान से अरब प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है और दक्षिणपंथी खेमे के कुछ छोटे दल चुनावी न्यूनतम सीमा से नीचे जा सकते हैं, जिससे नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना कठिन हो सकता है।