इजरायल का सीरिया में तुर्की के खिलाफ हमला: क्या बढ़ रहा है तनाव?
इजरायल की वायुसेना का ताजा हमला
इजरायल की वायुसेना ने 18 अगस्त को तुर्की की सीमा से लगभग 70 किलोमीटर दूर सीरिया के अबू अल-दुहुर एयरबेस पर जोरदार बमबारी की। इस हमले में रनवे और हैंगरों को निशाना बनाया गया। इजरायल का कहना है कि तुर्की यहां अपने सैन्य बल को बढ़ाने की कोशिश कर रहा था, जिसे रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई। तुर्की, सीरिया और पाकिस्तान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। इस हमले के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं, जिसमें यह सवाल उठता है कि क्या इजरायल एक नई जंग की तैयारी कर रहा है और क्या तुर्की उसके रडार पर आ चुका है।
बयानबाजी से आगे बढ़ा तनाव
अब तक तुर्की और इजरायल के बीच केवल तीखी बयानबाजी चल रही थी, लेकिन इस ताजा हमले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अब दुनिया भर में प्रत्यक्ष संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस स्थिति में फंस गए हैं, जहां उन्हें एक तरफ तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन और दूसरी तरफ इजरायल के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना है। इजरायल ने पहले भी इस एयरबेस पर बमबारी की है, जब यहां से हिजबुल्लाह को हथियार भेजे जा रहे थे।
इजरायल के पीएमओ का बयान
हमले के 20 घंटे बाद इजरायल ने स्वीकार किया कि यह कार्रवाई उसकी थी। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इजरायल और सीरिया के बीच सुरक्षा मामलों में यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति थी, लेकिन सीरिया ने तुर्की सैनिकों को तैनात करने की अनुमति देकर इस समझौते का उल्लंघन किया। इजरायल ने बार-बार चेतावनी दी थी कि ऐसी तैनाती उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
तुर्की की प्रतिक्रिया
इजरायल के पीएमओ के बयान पर तुर्की ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया कि इजरायल के आरोप सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले उसके गैर-कानूनी हवाई हमलों को सही ठहराने के लिए हैं। तुर्की ने कहा कि वह क्षेत्र में स्थायी शांति का पक्षधर है और नेतन्याहू को अपनी आक्रामक नीतियों को छोड़ने की सलाह दी।
तुर्की का संयमित बयान
तुर्की का यह बयान काफी संयमित है, जबकि एर्दोगन ने पहले नेतन्याहू को हत्यारा और तानाशाह कहा था। हाल ही में तुर्की के विदेश मंत्री ने इजरायल के खिलाफ कठोर कदम उठाने की धमकी दी थी। लेकिन अब तुर्की ने नपे-तुले शब्दों में प्रतिक्रिया दी है, जो दर्शाता है कि वह टकराव से बचना चाहता है।
ट्रंप की दुविधा
डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध में उलझे हुए हैं और नहीं चाहते कि मध्य पूर्व में एक और युद्ध शुरू हो। इजरायल के हमले ने उन्हें एक नई दुविधा में डाल दिया है। अब उन्हें एर्दोगन के साथ दोस्ती और इजरायल के साथ रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन बनाना है।
इजरायल का संदेश
इजरायल का यह हमला उन देशों के लिए एक चेतावनी है जो तुर्की के साथ सैन्य संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तुर्की की सैन्य मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में तनाव
हमले की जिम्मेदारी इजरायल ने पहले 20 घंटे तक नहीं ली, लेकिन बाद में इसे स्वीकार किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन और इजरायल के बीच समन्वय की कमी हो रही है।
क्या इजरायल युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
इजरायल के पूर्व और वर्तमान नेताओं का मानना है कि तुर्की नया ईरान बन रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा है कि उनकी सुरक्षा की शुरुआत बेरूत और दमिश्क से होती है। इस प्रकार, विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया में इजरायल और तुर्की के बीच युद्ध की संभावना बढ़ रही है।
सीरिया में तुर्की का दखल
एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने वाशिंगटन को सूचित किया था कि तुर्की सीरियाई एयरबेस में अत्याधुनिक हथियार भेजने की योजना बना रहा है। इस खतरे को रोकने के लिए ही इजरायल ने हमला किया।
