Newzfatafatlogo

इजरायल की राजनीति में 'राम' का उभरता महत्व: नेतन्याहू की सत्ता पर खतरा?

इजरायल की राजनीति में 'राम' पार्टी का महत्व बढ़ता जा रहा है, खासकर आगामी चुनावों में। क्या बेंजामिन नेतन्याहू अपनी सत्ता बनाए रखेंगे या विपक्ष उन्हें चुनौती देगा? इस लेख में जानें इजरायल की चुनावी प्रणाली, नेतन्याहू और गादी आइजेनकोट के बीच मुकाबला, और 'राम' पार्टी की संभावित भूमिका के बारे में। क्या छोटी पार्टियां अगली सरकार के गठन में महत्वपूर्ण साबित होंगी? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 | 

इजरायल में चुनावी गणित


नई दिल्ली: इजरायल की राजनीतिक स्थिति में 'राम' नाम एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकता है। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक गहरा राजनीतिक तर्क है। यदि चुनाव के परिणामस्वरूप किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलता, तो एक छोटी पार्टी सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस संदर्भ में, यह जानना जरूरी है कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू अपनी सत्ता बनाए रखेंगे या विपक्ष उन्हें चुनौती देकर सरकार बना लेगा। इसका उत्तर इजरायल की चुनावी प्रणाली और परिणामों के बाद बनने वाले गठबंधनों पर निर्भर करेगा।


इजरायल में सरकार बनाने की प्रक्रिया

इजरायल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। भारत के विपरीत, यहां मतदाता किसी उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। देशभर में पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात के आधार पर उन्हें संसद में सीटें मिलती हैं। इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली कहा जाता है।


इजरायल में संसद में सीट पाने के लिए किसी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट प्राप्त करने होते हैं। कई दलों के चुनाव में भाग लेने के कारण किसी एक पार्टी के लिए अपने दम पर बहुमत प्राप्त करना कठिन होता है। इसलिए, गठबंधन सरकारें बनाना आम बात है। चुनाव के बाद राष्ट्रपति किसी नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, जिसे 61 सांसदों का समर्थन जुटाना होता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो दूसरे नेता को मौका मिल सकता है या दोबारा चुनाव कराने की आवश्यकता पड़ सकती है।


नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच मुकाबला

इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की नई पार्टी याशार के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेतन्याहू को दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों का समर्थन प्राप्त है, जबकि विपक्ष कई हिस्सों में बंटा हुआ है। चुनावी अनुमानों में नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 50 से 55 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यदि कोई भी पक्ष बहुमत तक नहीं पहुंचता, तो छोटी पार्टियों की भूमिका बढ़ सकती है।


इजरायल की राजनीति में 'राम' का स्थान

यहां 'राम' से तात्पर्य राअम (Ra’am) पार्टी से है, जिसका पूरा नाम यूनाइटेड अरब लिस्ट है। इसके नेता मंसूर अब्बास हैं। यह पार्टी इजरायल के अरब नागरिकों के मुद्दों को उठाती है। देश की लगभग 20 प्रतिशत आबादी अरब नागरिकों की है, जिन्हें इजरायल के चुनावों में वोट देने का अधिकार है। 2021 में राअम ने गठबंधन सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मौजूदा चुनावी अनुमानों में इसे लगभग पांच से छह सीटें मिलने की संभावना है। यदि बहुमत का आंकड़ा किसी भी गठबंधन से दूर रहता है, तो ये सीटें सरकार बनाने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


क्या नेतन्याहू 'राम' पार्टी का सहारा लेंगे?

राअम की विचारधारा और नेतन्याहू की राजनीति में बड़ा अंतर है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर इजरायल में राजनीतिक मतभेद और गहरे हुए हैं। हालांकि, राअम नेता मंसूर अब्बास का कहना है कि उनकी पार्टी उन राजनीतिक समझौतों के लिए तैयार है, जो अरब नागरिकों को लाभ पहुंचाएं। लेकिन राअम को सीटें मिलना और किसी गठबंधन को समर्थन देना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नेतन्याहू या विपक्ष में से कौन उसकी मदद लेगा। चुनाव के बाद होने वाली बातचीत ही इसका निर्णय करेगी। ऐसे में इजरायल की अगली सरकार का रास्ता छोटी पार्टियों के समर्थन से भी खुल सकता है।