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इजरायल के टारगेट किलिंग ऑपरेशन: दुश्मनों के खिलाफ सटीक हमले

इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए कई टारगेट किलिंग ऑपरेशनों को अंजाम दिया है। इस लेख में, हम इजरायल के कुछ प्रमुख ऑपरेशनों का विश्लेषण करेंगे, जैसे अली हसन सलामेह, अबू जिहाद, और महमूद अल-मबहूह की हत्याएं। इन ऑपरेशनों ने न केवल इजरायल के दुश्मनों में खौफ पैदा किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बने। जानिए इन ऑपरेशनों की रणनीतियों और परिणामों के बारे में।
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इजरायल की खुफिया एजेंसियों की रणनीति

इजरायल अपने दुश्मनों को चुन-चुनकर खत्म करने के लिए जाना जाता है। इसकी खुफिया एजेंसियां, जैसे मोसाद, शिन बेट और मिलिट्री इंटेलिजेंस, वर्षों तक अपने लक्ष्यों का पीछा करती हैं। अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए, वे दूर से ही हत्याकांड को अंजाम देती हैं। मिसाइल, ड्रोन, रिमोट कंट्रोल गन और ड्राइवरलेस कारों का इस्तेमाल कर इजरायल ने कई सफल ऑपरेशन किए हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से, इजरायल ने अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए टारगेट किलिंग का सहारा लिया है।


अली हसन सलामेह का अंत

इजरायल ने ब्लैक सितंबर के प्रमुख सदस्यों में से एक अली हसन सलामेह का पीछा किया। 22 जनवरी 1979 को, उसे लेबनान की राजधानी बेरूत में उसकी कार में विस्फोटक लगाकर उड़ा दिया गया। इस हमले में सलामेह के साथ कई अन्य लोग भी मारे गए। सलामेह का संबंध म्यूनिख ओलंपिक हमले से था, और मोसाद ने उसे ट्रैक करने के लिए वर्षों तक योजना बनाई।


अबू जिहाद की हत्या

इजरायल ने 16 अप्रैल 1988 को फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के नेता अबू जिहाद को मार गिराया। वह ट्यूनीशिया के सिदी बू सईद में छिपा हुआ था। इजरायली कमांडो आधी रात को उसके घर में घुसे और सुरक्षा गार्डों को मारकर अबू जिहाद की हत्या कर दी। इस ऑपरेशन के दौरान इजरायली सैन्य विमान आसमान में थे।


दुबई में महमूद अल-मबहूह का अंत

19 जनवरी 2010 को, इजरायली एजेंटों ने दुबई में एक चौंकाने वाला ऑपरेशन किया। उन्होंने फर्जी पहचान के साथ महमूद अल-मबहूह को होटल में मार डाला। इस ऑपरेशन में कई दिनों तक निगरानी की गई और अंततः उसे तकिये से दम घोंटकर खत्म किया गया।


फखरीजादेह की हत्या

इजरायल ने 2010 से 2020 के बीच ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया। 27 नवंबर 2020 को, मोहसिन फखरीजादेह को एक अत्याधुनिक रिमोट कंट्रोल गन से मारा गया। यह ऑपरेशन 1000 मील दूर से संचालित किया गया था।


ऑपरेशन 'रैथ ऑफ गॉड'

1972 में म्यूनिख ओलंपिक में इजरायली खिलाड़ियों की हत्या के बाद, इजरायल ने ऑपरेशन 'रैथ ऑफ गॉड' शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत, इजरायली खुफिया एजेंसी ने 20 वर्षों तक आतंकियों को निशाना बनाया।


मोसाद का विफल ऑपरेशन

1997 में, मोसाद ने हमास के नेता खालिद मशाल को मारने की कोशिश की, लेकिन जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने इजरायली एजेंटों को पकड़ लिया। इसके परिणामस्वरूप, इजरायल को मशाल की जान बचाने के लिए एंटीडोट देना पड़ा।