इजरायल चुनाव 2026: अरब पार्टियों का ऐतिहासिक प्रदर्शन, क्या बनेगी नई सरकार?
इजरायल में अरब पार्टियों का प्रभावी प्रदर्शन
नई दिल्ली: इजरायल में मंगलवार को हुए आम चुनाव ने अरब पार्टियों को एक नई पहचान दिलाई है। चुनावी परिणामों के अनुसार, देश की दो प्रमुख अरब पार्टियों ने लगभग 19 सीटें जीतने का अनुमान लगाया है, जो कि उनकी वर्तमान स्थिति से दोगुना है। इस शानदार प्रदर्शन के बाद, अरब पार्टियों की सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
रूझानों के अनुसार, यूसुफ जबरीन के नेतृत्व वाला जॉइंट लिस्ट गठबंधन और मंसूर अब्बास की राम (Ra’am) पार्टी को बड़ी सफलता मिली है। जॉइंट लिस्ट को अकेले 12 सीटें मिलने की संभावना है। दोनों पार्टियों का मिलकर 19 सीटों तक पहुंचना इजरायली राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार को समर्थन देने की तैयारी
सरकार को बाहर से समर्थन का संकेत
जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी इस ताकत का उपयोग बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को हटाने के लिए करेगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे गाजा में सैन्य कार्रवाई और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के मुद्दे पर आइजनकोट के दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं, इसलिए वे सीधे सरकार में शामिल नहीं होंगे। लेकिन, वे आइजनकोट के गठबंधन को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार हैं। उनकी प्राथमिकता अरब समुदाय के अधिकारों की रक्षा और समानता को बढ़ावा देना है।
वहीं, राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने सरकार में शामिल होने के संकेत दिए हैं। 52 वर्षीय दंत चिकित्सक और पूर्व सांसद अब्बास ने अपनी पार्टी को अधिक स्वीकार्य बनाने के लिए लिस्ट में एक यहूदी पूर्व पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया था। उन्होंने कहा कि आइजनकोट खेमे के वरिष्ठ नेताओं से संभावित समझौते पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। यहां तक कि दक्षिणपंथी खेमे के एक प्रमुख नेता ने भी उनसे संपर्क किया था।
नेतन्याहू और आइजनकोट का अरब गठबंधन से इनकार
नेतन्याहू और आइजनकोट ने अरब गठबंधन से किया इनकार
हालांकि, राह आसान नहीं है। आइजनकोट ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था, यह कहते हुए कि दोनों पक्षों के बीच साझा मूल्य नहीं हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने भी कहा है कि वह अरब पार्टियों से कोई बातचीत नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि इजरायल की कुल जनसंख्या में लगभग 21 लाख अरब नागरिक हैं, जो 20 प्रतिशत हैं। देश के 20 प्रतिशत से अधिक डॉक्टर और एक चौथाई नर्सें अरब समुदाय से हैं। 2021 में, राम पार्टी पहली बार बेनेट-लैपिड सरकार में शामिल हुई थी। अब एक बार फिर अरब पार्टियां किंगमेकर के रूप में उभरी हैं।
