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इजरायल-लेबनान सीमा पर बढ़ती हिंसा: क्या अमेरिका-ईरान समझौता संकट में है?

इजरायल और लेबनान की सीमा पर हालिया हिंसा ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को धूमिल कर दिया है। इजरायली सेना और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष में कई सैनिकों की मौत हुई है, जबकि लेबनान में हवाई हमलों से नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। क्या यह संघर्ष अमेरिका-ईरान वार्ता को प्रभावित करेगा? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में।
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इजरायल-लेबनान सीमा पर बढ़ती हिंसा: क्या अमेरिका-ईरान समझौता संकट में है?

नई दिल्ली में बढ़ती चिंताएं


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में शांति की संभावनाओं के बीच, इजरायल और लेबनान की सीमा पर फिर से हिंसा भड़क उठी है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच रातभर चले संघर्ष में चार इजरायली सैनिकों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। वहीं, लेबनान में इजरायली हवाई हमलों के चलते कम से कम 18 लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की सूचना है। यह घटनाएं उस समय हुई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था।


सैन्य अधिकारियों की रिपोर्ट

इजरायली सेना के अनुसार, मारे गए सैनिकों में एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल था। इसके अलावा, हिज्बुल्लाह द्वारा किए गए ड्रोन हमले में पांच सैनिक घायल हुए हैं। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर कई मोर्चों पर झड़पें हुईं और हाल के महीनों में संघर्ष की तीव्रता सबसे अधिक रही।


लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश के दक्षिणी हिस्से में हवाई हमलों से बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं। राहत कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं क्योंकि लगातार बमबारी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचना मुश्किल हो गया है। अधिकारियों का अनुमान है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। सबसे अधिक नुकसान टायर शहर के निकट हारौफ गांव में हुआ है, जहां कई मकान ध्वस्त हो गए हैं और लोग मलबे में दबे होने की आशंका है।


फ्रांस की अपील

इस बीच, फ्रांस ने अमेरिका से हस्तक्षेप करने और इजरायल पर दबाव डालने की अपील की है ताकि लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित किया जा सके। फ्रांसीसी अधिकारियों का मानना है कि यदि यह लड़ाई जारी रहती है, तो अमेरिका और ईरान के बीच हाल में बनी सहमति कमजोर हो सकती है। यह समझौता पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को कम करने और आगे की बातचीत का रास्ता खोलने के लिए किया गया था।


इजरायल का कहना है कि उसके हमले हिज्बुल्लाह की गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं। इजरायली सेना के अनुसार, संगठन लगातार संघर्षविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा था और सीमा के पास अपने ठिकानों से हमले कर रहा था। वहीं, लेबनानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष बढ़ने के बाद दक्षिणी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।


संघर्ष की गंभीरता

रात की सबसे महत्वपूर्ण भिड़ंत लितानी नदी के उत्तर में अली अल-ताहेर पहाड़ी क्षेत्र में हुई। यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिज्बुल्लाह ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने घात लगाकर हमला किया और इजरायली सैन्य वाहनों को निशाना बनाया। संगठन का यह भी कहना है कि उसने रॉकेट और मिसाइलों के जरिए इजरायली सेना को भारी नुकसान पहुंचाया।


इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को लेकर भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने तनाव कम करने, परमाणु मुद्दे पर आगे बातचीत करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे कदमों पर सहमति जताई है। हालांकि, लेबनान में बढ़ती हिंसा ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। इसी कारण अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा भी स्थगित कर दिया गया, जहां ईरान के साथ अगले दौर की वार्ता प्रस्तावित थी।


समझौते पर मतभेद

इजरायल के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने सैनिकों की मौत के बाद कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और युद्ध को व्यापक रूप लेने से रोकने की कोशिश कर रहा है।


विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान मोर्चे पर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस नए संकट को नियंत्रित कर पाएंगे या मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।