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इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी का नया आदेश: स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसमें स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने और उनके अभिभावकों को इटैलियन भाषा सीखने की अनिवार्यता भी जोड़ी गई है। मेलोनी का मानना है कि इटली में रहने वाले लोगों को यहां की संस्कृति और नियमों का सम्मान करना चाहिए। इस कदम के पीछे लैंगिक समानता और समाज में बेहतर समावेश का उद्देश्य है। जानें इस निर्णय के पीछे की वजहें और अन्य देशों में लागू पाबंदियों के बारे में।
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जॉर्जिया मेलोनी का विवादास्पद निर्णय


नई दिल्ली: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जो काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक युवा सम्मेलन में, उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके अलावा, विदेशी छात्रों की संख्या को भी सीमित किया जाएगा और उनके अभिभावकों को इटैलियन भाषा सीखना अनिवार्य होगा। मेलोनी का मानना है कि जो लोग इटली में रहना चाहते हैं, उन्हें यहां की भाषा, संस्कृति और नियमों का सम्मान करना चाहिए।


स्कूलों में चेहरा छिपाना नहीं होगा स्वीकार्य

मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूलों में किसी का चेहरा छिपाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि कोई भी परंपरा किसी को अपने आप को छिपाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। यह कदम लैंगिक समानता और समाज में बेहतर समावेश के लिए उठाया जा रहा है। 2027 के चुनावों से पहले इमिग्रेशन का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है, इसलिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।


इटली का मौजूदा कानून

इटली में 1975 का एक कानून है, जो सीधे तौर पर बुर्का पर प्रतिबंध नहीं लगाता, लेकिन हेलमेट या ऐसे कपड़ों से चेहरा ढकने पर पाबंदी है, जिससे पहचान छिपाई जा सके। 2008 में कुछ नियमों में ढील दी गई थी, जिससे धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से चेहरा ढकने की अनुमति दी गई थी। हाल ही में, मेलोनी की पार्टी ने एक नया बिल पेश किया है, जिसमें धार्मिक स्थलों को छोड़कर सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी के बाद 60 दिनों में संसद से पास कराना होगा।


अन्य देशों में पहले से लागू पाबंदियाँ

यूरोप के कई देशों ने पहले ही इस दिशा में कदम उठाए हैं। फ्रांस ने 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाया था। बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, बुल्गारिया और स्विट्जरलैंड में भी चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर बैन है। नीदरलैंड में स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक परिवहन में आंशिक पाबंदी है। हाल ही में, पुर्तगाल ने भी सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर प्रतिबंध लगाया है। अफ्रीका के देशों जैसे कैमरून, चाड और मोरक्को में सुरक्षा कारणों से भी रोक लगाई गई है।


चीन में भी सख्त पाबंदियाँ

पाकिस्तान के करीबी मित्र चीन में, शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुस्लिम समुदाय के लिए चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर सख्त पाबंदी है। उरुमची और पूरे शिनजियांग में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का या नकाब पहनना मना है। चीनी अधिकारी इसे धार्मिक उग्रवाद को रोकने और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने का एक तरीका मानते हैं। 2014 से 2017 के बीच कई नियम बनाए गए, जिनमें असामान्य दाढ़ी और चेहरा छिपाने वाले कपड़ों को उग्रवाद का प्रतीक माना गया।