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ईरान-अमेरिका तनाव: उत्तरी इराक में अमेरिकी सैनिक की मौत से बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच उत्तरी इराक में एक अमेरिकी सैनिक की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस घटना के बाद से अमेरिकी सैनिकों की मौतों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। जॉर्डन में हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इस तनावपूर्ण स्थिति में इजरायल भी अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा रहा है। जानें इस जटिल स्थिति के सभी पहलुओं के बारे में।
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मध्य पूर्व में तनाव की नई लहर


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक और गंभीर घटना सामने आई है। उत्तरी इराक में एक गिराए गए ईरानी ड्रोन से जुड़े विस्फोटक को निष्क्रिय करने के प्रयास में एक अमेरिकी सैनिक की जान चली गई। यह घटना पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ा देती है। अमेरिका और ईरान दोनों ही लगातार एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है।


सैन्य कार्रवाई का विवरण

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने रविवार को बताया कि 18 जुलाई को उत्तरी इराक में एक ईरानी ड्रोन के अवशेषों से मिले बमों को नियंत्रित तरीके से नष्ट किया जा रहा था, तभी यह विस्फोट हुआ। इस घटना में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य सैनिक घायल हुआ है, लेकिन उसकी चोटें गंभीर नहीं हैं और उसका इलाज चल रहा है।


मृतकों की संख्या में वृद्धि

इस घटना के बाद से 28 फरवरी से जारी संघर्ष में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 17 हो गई है। सेना ने यह भी बताया कि एक अलग अभियान में लापता सैनिकों से संबंधित कुछ मानव अवशेष मिले हैं, जिनकी पहचान की प्रक्रिया चल रही है।


जॉर्डन में हमले के बाद की स्थिति

यह घटना उस समय हुई जब जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में मारे गए थे। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सेंटकॉम ने मृत सैनिकों के परिवारों को आधिकारिक सूचना देने तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का निर्णय लिया है।


अमेरिका की सैन्य कार्रवाई

जॉर्डन में हुई घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। अमेरिकी सेना ने बताया कि इन हमलों का उद्देश्य उन ईरानी सैन्य इकाइयों को निशाना बनाना था, जो अमेरिकी सैनिकों पर हमलों के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। सेंटकॉम ने कहा कि इन हमलों का मकसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचाना था।


ईरान का जवाबी हमला

अमेरिकी कार्रवाई के कुछ घंटों बाद, ईरान ने कुवैत में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों का दावा किया। ईरानी सेना ने कहा कि कैंप उदैरी के गोला-बारूद डिपो और अली अल सलेम एयर बेस पर पैट्रियट रडार प्रणाली को निशाना बनाया गया। बहरीन की सेना ने भी ईरान के कई हवाई हमलों को समय पर रोकने का दावा किया है।


क्षेत्र में बढ़ती सतर्कता

जॉर्डन में इजरायली और जॉर्डन की संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था ने एक ईरानी मिसाइल को बीच में ही नष्ट कर दिया। वहीं, कुवैत के बिजली मंत्रालय ने बताया कि उसके एक संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला हुआ, जिससे आग लग गई, लेकिन राहत दल ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।


इजरायल की सैन्य तैयारियाँ

बढ़ते तनाव के बीच, इजरायल अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहा है। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने बताया कि अमेरिका क्षेत्र में अतिरिक्त हवाई ईंधन भरने वाले विमानों की तैनाती की योजना बना रहा है। हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इजरायल इस समय अमेरिकी हमलों में सीधे शामिल नहीं है।


खामेनेई की चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले समझौते को भी खारिज किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।