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ईरान-अमेरिका तनाव: क्या हो सकता है अगला बड़ा हमला?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जबकि ईरानी अधिकारियों ने समुद्र के नीचे की संचार केबलों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस बीच, कई देशों ने बातचीत और कूटनीति के माध्यम से स्थिति को सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्या यह तनाव युद्ध का रूप ले सकता है? जानें इस जटिल स्थिति के सभी पहलुओं के बारे में।
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तनाव की नई लहर


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बार फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि यदि हमला होता है, तो वे खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और 'लिटिल एपिक फ्यूरी' कर सकता है, जो 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान विरोधी अमेरिकी सैन्य अभियान का नाम है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कार्रवाई कब और किस प्रकार की होगी।


युद्ध की संभावनाएं

ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिका युद्ध को जल्दी समाप्त कर सकता है और यह सवाल उठाया कि इसे तुरंत खत्म किया जाए या धीरे-धीरे कमजोर किया जाए। उनके अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निरंतर गुजर रहा है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है जो वह चाहता है। इस महीने उन्होंने यह भी कहा था कि अगले महीने के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर कोई हमला नहीं होगा। युद्ध में हजारों लोगों की मौत और लाखों लोगों के विस्थापन की आशंका जताई गई है, जबकि ईंधन की कीमतें भी बढ़ रही हैं।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

कई देशों की चेतावनी


शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि नया हमला तनाव को और बढ़ाएगा और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल सकता है। उनके अनुसार, बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र समाधान है।


फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने कहा कि तनाव बढ़ने से किसी को भी लाभ नहीं होगा और यह तेल की कीमतों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके।


इंटरनेट केबल पर खतरा

इंटरनेट केबल काटने की धमकी


दो वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यदि हमला होता है, तो समुद्र के नीचे की केबल और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। उनका दावा है कि ईरान को इन केबलों तक पूरी पहुंच है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने कहा कि ईरान होर्मुज के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।


आर्थिक प्रभाव

इंटरनेट और कारोबार पर असर


समुद्र के नीचे की केबल दुनिया के लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक को संभालती हैं। होर्मुज से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से कम गुजरता है, फिर भी कई केबलों के कटने से इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है, जिससे वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ट्रैफिक कितनी जल्दी दूसरी लाइनों पर भेजा जाता है। युद्ध के दौरान मरम्मत करना भी मुश्किल होगा, क्योंकि बीमा लागत बढ़ जाएगी और समुद्री क्षेत्र में जाने की अनुमति में देरी हो सकती है।


खाड़ी देशों ने एआई केंद्र बनने के लिए तकनीकी ढांचे में भारी निवेश किया है। मार्च में यूएई में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान हुआ, जबकि बहरीन में भी एक सुविधा के पास ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ। जमीन के रास्ते वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं और माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश की योजना बनाई है।