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ईरान-अमेरिका समझौते के बाद भी लेबनान में इजरायल के हमले, क्या है स्थिति?

हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद, दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, इजरायल ने कई क्षेत्रों को निशाना बनाया है। इस बीच, क्षेत्र में संघर्ष विराम बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं, लेकिन तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। जानें इस स्थिति का मानवीय प्रभाव और इजरायल की रणनीति क्या है।
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ईरान-अमेरिका समझौते के बाद भी लेबनान में इजरायल के हमले, क्या है स्थिति?

नई दिल्ली में बढ़ी चिंताएं


नई दिल्ली: हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदें जगाई थीं, लेकिन इसके तुरंत बाद दक्षिणी लेबनान में नए हमलों की सूचना आई है। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRIB के अनुसार, इजरायल ने लेबनान के कई क्षेत्रों को निशाना बनाया है।


तोपखाने से हमले की जानकारी

रिपोर्टों के मुताबिक, जवतार, मरकबा और खियाम क्षेत्रों में इजरायल ने हवाई हमलों के साथ-साथ तोपखाने से भी गोलाबारी की। हालांकि, इन हमलों में किसी के घायल या मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन और लेबनानी मीडिया स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।


संघर्ष विराम की कोशिशें

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में संघर्ष विराम बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं। फिर भी, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। दक्षिणी लेबनान के अधिकारियों ने उन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, जो हाल के संघर्ष के कारण अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे। प्रशासन ने कहा है कि सुरक्षा स्थिति सामान्य होने तक घर लौटने में जल्दबाजी न करें।


ट्रंप की उम्मीदें और वास्तविकता

सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि इससे लेबनान समेत विभिन्न मोर्चों पर हिंसा में कमी आएगी। लेकिन IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में हालिया हमले इस उम्मीद के विपरीत संकेत दे रहे हैं।


इजरायल की स्थिति

इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सैन्य मौजूदगी समाप्त करने का इरादा नहीं रखता। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उनकी रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।


मानवीय संकट की गंभीरता

लेबनान में जारी संघर्ष का मानवीय प्रभाव भी गंभीर है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से चल रही हिंसा के कारण कई लोगों की जान गई है और लाखों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। इजरायल का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का लक्ष्य ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के ठिकाने हैं।


इजरायल की स्वतंत्रता का दावा

इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन-ग्विर ने कहा है कि अमेरिका की मध्यस्थता से हुए किसी भी समझौते को इजरायल पर बाध्यकारी नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले स्वयं लेने में सक्षम है।