ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था में वृद्धि
मध्य पूर्व में तनाव की नई लहर
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। ईरान ने बुधवार को बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने 21 हमलों का दावा किया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का प्रतिशोध है। इससे पहले, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के निकट ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटरों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना ने कहा था कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक थी। वहीं, ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हुए कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी थी.
अमेरिकी हेलिकॉप्टर दुर्घटना और उसके परिणाम
तनाव उस समय और बढ़ गया जब होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलिकॉप्टर समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका इसका जवाब देगा। हालांकि, ईरान ने हेलिकॉप्टर गिराने में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
इस बीच, इजराइल ने भी संकेत दिए हैं कि यदि आवश्यक हुआ, तो वह ईरान के खिलाफ और सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
रूस की मध्यस्थता की अपील
ट्रम्प ने यह दावा किया है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बढ़त बनाए हुए है। उनके बयानों ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। बढ़ते संघर्ष के बीच, रूस ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने की अपील की है। रूस का कहना है कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। यदि दोनों पक्ष जल्द बातचीत का रास्ता नहीं अपनाते हैं, तो यह स्थिति वैश्विक संकट का रूप ले सकती है।
