ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के लिए उम्मीदें बढ़ीं
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और रुके हुए तेल निर्यात को बहाल करने में मदद कर सकती है। ट्रंप ने इस वार्ता को सकारात्मक बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे ईंधन की कीमतों में कमी आ सकती है। ईरान की सेना भी किसी बाहरी खतरे का सामना करने के लिए तैयार है। जानें इस महत्वपूर्ण विकास के बारे में और क्या संभावनाएँ बन रही हैं।
| Aug 8, 2026, 15:54 IST
ईरान और ओमान के बीच वार्ता में सकारात्मक संकेत
एक अमेरिकी अधिकारी ने जानकारी दी है कि ईरान और ओमान के बीच बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह विकास 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को फिर से खोलने और पिछले पांच महीनों से रुके हुए तेल निर्यात को बहाल करने में सहायक हो सकता है। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई समझौता होगा, जिससे सामान्य तेल शिपमेंट फिर से शुरू हो सकेंगे। इस जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर समझौता होना, शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कमर्शियल शिपिंग बहाल करने की उम्मीद
अधिकारी ने कहा कि ओमान और ईरान के बीच इस जलडमरूमध्य को लेकर प्रगति हुई है और जल्द ही समझौते की उम्मीद है। एक बार जब कमर्शियल शिपिंग बहाल करने का समझौता हो जाएगा, तो अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा लेगा।
ट्रंप की उम्मीदें और ईंधन की कीमतें
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य के कदम ईरान की जिम्मेदारियों को पूरा करने पर निर्भर करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल होती है, तो इससे ईंधन की कीमतों में कमी आ सकती है। ट्रंप ने कहा कि बातचीत में प्रगति से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक को स्थिर करने में मदद मिलेगी।
कूटनीतिक प्रयासों पर ट्रंप का विश्वास
ट्रंप ने कूटनीतिक प्रयासों पर सकारात्मकता व्यक्त करते हुए कहा कि वह बातचीत में शामिल हैं और स्थिति को लेकर आशावादी हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताएँ हैं, लेकिन बातचीत आगे बढ़ रही है।
ईरान की सैन्य तैयारियाँ
इस बीच, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल माजिद एब्न-ए-रेज़ा ने कहा कि उनकी सेना किसी भी बाहरी खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत को उसके अपने रक्षा उद्योग पर आधारित बताया।
