Newzfatafatlogo

ईरान और सीरिया के परमाणु मुद्दे पर इजरायल और अमेरिका की चिंताएं

ईरान और सीरिया के परमाणु मुद्दों पर इजरायल और अमेरिका की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। ईरान के फोर्डो संयंत्र में दफन संवर्धित यूरेनियम और सीरिया के अल-किबार संयंत्र की स्थिति ने इन देशों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। इजरायल ने सीरिया में परमाणु सामग्री को हटाने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर योजना बनाई है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और कैसे ये देश इस संकट का सामना कर रहे हैं।
 | 

ईरान के फोर्डो संयंत्र में दफन संवर्धित यूरेनियम

अमेरिका और इजरायल का मानना है कि ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र में लगभग 400 किलो संवर्धित यूरेनियम छिपा हुआ है। पिछले साल जून में, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के तीन परमाणु स्थलों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर बंकर बस्टर बमों से हमला किया था। कुछ खुफिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि फोर्डो प्लांट के मलबे के नीचे 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम दबा हुआ है।


ईरान का यूरेनियम छिपाने का प्रयास

इजरायल का मानना है कि ईरान ने इस यूरेनियम का कुछ हिस्सा पास की पहाड़ियों में बनी सुरंग में छिपा दिया है। इसके अलावा, एक अन्य देश भी है, जिसके परमाणु संयंत्र के नीचे 29 वर्षों से परमाणु सामग्री दफन है।


सीरिया में तख्तापलट और इजरायल की चिंता

दो साल पहले सीरिया में तख्तापलट के बाद इजरायल की चिंताएं बढ़ गईं। इजरायल ने परमाणु संयंत्र के दरवाजे पर बमबारी की ताकि चरमपंथी संगठनों के हाथों यह सामग्री न लगे। हाल ही में परमाणु संयंत्र के आसपास की गतिविधियों ने इजरायल की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका को हस्तक्षेप करना पड़ा है।


इजरायल के हमले का इतिहास

इजरायल ने सामूहिक विनाश के हथियार विकसित करने के आरोप में तीन देशों पर हमले किए हैं। 1981 में इराक के खिलाफ ऑपरेशन ओपेरा चलाया गया था, जिसमें इजरायली वायुसेना ने बगदाद के पास ओसिरिस परमाणु रिएक्टर पर बमबारी की। इसके बाद अमेरिका ने इराक के खिलाफ एक बड़ा युद्ध छेड़ा। 2007 में, इजरायल ने सीरिया के अल-किबार क्षेत्र में ऑपरेशन ऑर्चर्ड के तहत हमला किया। हाल ही में, इजरायल ने ईरान के नतांज समेत कई परमाणु ठिकानों पर बमबारी की।


सीरिया का अल-किबार संयंत्र

अब, लगभग 29 साल बाद, सीरिया का अल-किबार परमाणु संयंत्र चर्चा में है। खबरें आ रही हैं कि अमेरिका इस संयंत्र के नीचे दफन परमाणु सामग्री को हटाने की योजना बना रहा है। यह घटनाक्रम सीरिया और इजरायल के बीच हुए समझौते के बाद सामने आया है।


इजरायल की धमकी और सीरिया का जवाब

इजरायल को चिंता थी कि सीरिया की नई सरकार परमाणु सामग्री तक पहुंच रोक सकती है। इसके बाद इजरायल ने अमेरिका के साथ कूटनीतिक प्रयास तेज किए और सीरिया को हमले की धमकी दी। नतीजतन, पिछले साल सीरिया की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को प्लांट के निरीक्षण की अनुमति दे दी।


तुर्की का दखल और इजरायल की चिंताएं

सीरिया में तुर्की का दखल काफी गहरा है। इजरायल को यह डर था कि तुर्की सीरियाई सरकार को परमाणु सामग्री निकालने में मदद कर सकता है। हाल ही में परमाणु प्लांट के आसपास हुई गतिविधियों ने इजरायल की चिंताओं को बढ़ा दिया। इसके बाद इजरायल की धमकी और कूटनीतिक दबाव के चलते सीरिया की सरकार ने इजरायल के साथ समझौता किया।


डर्टी बम का खतरा

इजरायली खुफिया एजेंसी के अनुसार, सीरिया के परमाणु प्लांट में येलोकेक सामग्री हो सकती है, जिसे संवर्धित करके परमाणु बम बनाया जा सकता है। इसके अलावा, डर्टी बम बनाना भी संभव है, जो वातावरण में रेडियाधर्मी पदार्थ फैलाता है।


ईरान की चुनौती

यदि अमेरिका और इजरायल सीरिया से परमाणु सामग्री को हटाने में सफल हो जाते हैं, तो भी उनकी चिंताएं खत्म नहीं होंगी। सबसे बड़ी चुनौती ईरान में दफन 400 किलो संवर्धित यूरेनियम है, जो 60 प्रतिशत तक संवर्धित है। 90 प्रतिशत तक संवर्धित होने पर यह परमाणु बम बनाने के लिए उपयुक्त हो जाएगा।