ईरान का अमेरिका के साथ तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त रुख
ईरान ने बढ़ाया दबाव
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संबंध में अपने रुख को और अधिक कठोर बना दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका तेहरान की प्रमुख शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने पर विचार नहीं किया जाएगा।
अमेरिका से वादों की उम्मीद
गालिबाफ ने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के समझौते या रियायत के लिए तैयार नहीं है, जब तक अमेरिका अपनी ओर से किए गए वादों को पूरा नहीं करता। उन्होंने विशेष रूप से ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध समाप्त करने और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग की।
समझौते की शर्तें
‘जब तक वादे पूरे नहीं होते, होर्मुज बंद रहेगा’
सरकारी टेलीविजन पर दिए गए बयान में गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का निर्णय अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पूरा होने से जुड़ा है। उनका कहना है कि समझौता ज्ञापन (MoU) में निर्धारित शर्तों को लागू किए बिना ईरान जलमार्ग खोलने पर सहमत नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नाकाबंदी हटाना, तेल पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त करना और ईरान की संपत्तियों को मुक्त करना बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। तेहरान इन मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।
समझौते की समयसीमा समाप्त
60 दिन के समझौते की समयसीमा खत्म
ईरान का यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के समझौता ज्ञापन की अवधि समाप्त होने के बीच आया है, जिसकी समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त होनी थी। इस संदर्भ में गालिबाफ का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के प्रमुख समुद्री मार्गों में से एक है और इसका वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यधिक रणनीतिक महत्व है। इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। ऐसे में ईरान की ओर से इसे बंद रखने की चेतावनी का प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। गालिबाफ ने कहा कि ईरान शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
