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ईरान का अमेरिका से वार्ता पर सख्त रुख, कतर में शांति वार्ता जारी

कतर में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, लेकिन ईरान ने इस वार्ता में सख्त रुख अपनाया है। ईरान का कहना है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर सीधी बातचीत नहीं करेगा। इसके अलावा, ईरान के नेता ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार को बनाए रखने की बात कही है। जानें इस वार्ता के पीछे की पूरी कहानी और ईरान के ताजा बयान।
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अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए कतर में डेलिगेशन


अमेरिका-ईरान वार्ता का कतर में आयोजन


कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए पहुंचे हैं। हालांकि, ईरान ने इस वार्ता के प्रति एक सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर सीधी बातचीत करने की योजना नहीं बना रहा है।


ईरान का कहना है कि उसकी प्राथमिकता पहले से हुए अंतरिम समझौते को लागू करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल केवल इस महीने हुए एमओयू को लागू करने और कतर में फंसी ईरान की लगभग 57 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति जैसे तकनीकी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए दोहा आया है।


अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का इससे कोई संबंध नहीं है। कतर ने भी स्पष्ट किया है कि अमेरिकी टीम केवल मध्यस्थों से मिलेगी।


गालीबाफ का होर्मुज पर बयान

ईरान के नेता का बड़ा बयान


ईरान के नेता मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य ईरान के क्षेत्रीय जल का हिस्सा है और अमेरिका इसे सैन्यीकरण का आरोप लगाकर विवाद नहीं पैदा कर सकता।


गालीबाफ ने कहा कि ईरान ने होर्मुज पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ा है और वह किसी भी परिस्थिति में अपने इस रुख से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने इसे युद्ध के दौरान ईश्वर का उपहार बताया।


ईरान की ताकत होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान का अधिकार बना रहेगा


ईरान ने यह भी कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इस पर उसका अधिकार बना रहेगा। गालीबाफ ने बताया कि अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) में समुद्री सेवाओं के टोल में 60 दिनों की छूट केवल अस्थायी व्यवस्था है।


अमेरिका ने हाल ही में कहा था कि अब उसका होर्मुज पर अधिकार होगा और वह वहां के नियम अपने अनुसार तय करेगा।