ईरान का कड़ा संदेश: युद्ध की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य में बदलाव होगा
मिडिल-ईस्ट में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में तनाव कम होने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युद्ध फिर से भड़कता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पहले जैसी नहीं रहेगी। अराघची ने कहा कि 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद क्षेत्र में रणनीतिक परिवर्तन आ चुके हैं। दशकों से होर्मुज का मार्ग खुला रहा है, और ईरान तथा ओमान ने कभी भी जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं डाली, लेकिन वर्तमान संघर्ष ने सब कुछ बदल दिया है।
नई चुनौतियों का सामना
उन्होंने कहा, "हमें यह स्वीकार करना होगा कि अब नई परिस्थितियाँ हावी हैं। होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पहले जैसी नहीं रहेगी, और इसका प्रबंधन भी बदलेगा। इस विषय पर ओमान के साथ हमारी बातचीत हुई है और यह आगे भी जारी रहेगी।"
जंग की संभावनाएं
'तीसरी बार भी वही अंजाम होगा'
अराघची ने स्पष्ट रूप से कहा कि चाहे युद्ध हो या न हो, ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा, "हाल ही में फिर से युद्ध की चर्चा हो रही है, लेकिन मैं पहले से सोच रहा हूं कि युद्ध के बाद क्या होगा। यदि कोई समझदार है, तो वह ईरानी लोगों पर फिर से हमला करने की कोशिश नहीं करेगा। अमेरिका और इजरायल पहले ही दो बार प्रयास कर चुके हैं और परिणाम देख चुके हैं। यदि वे तीसरी बार प्रयास करना चाहते हैं, तो यह उनकी इच्छा है, लेकिन परिणाम वही होगा।"
ट्रंप का बयान और ईरान की प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान के बाद आया रिएक्शन
ईरान का यह कठोर रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद आया है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और छोटा अभियान 'एपिक फ्यूरी' चला सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव से पहले कोई हमला नहीं होगा और युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा। ध्यान रहे, होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल गुजरता है। यदि ईरान इसकी निगरानी या प्रबंधन में बदलाव करता है, तो इसका प्रभाव वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है।
