ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी विमानों पर हमला: क्या है इसके पीछे की कहानी?
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने यह दावा किया है कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सैन्य विमानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। यह कार्रवाई ईरान के भीतर रातभर हुए अमेरिकी हमलों के प्रतिशोध में की गई बताई जा रही है, जिसमें कम से कम 8 लोगों की जान जाने की सूचना है।
IRGC का बयान: अमेरिकी विमानों को नुकसान
ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने कहा है कि उनके हमले में कई अमेरिकी फ्यूल टैंकर और फाइटर जेट्स को नष्ट कर दिया गया है। इसके अलावा, कई अन्य विमानों को भी गंभीर क्षति पहुंची है।
IRGC ने जॉर्डन के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने देश में मौजूद "आक्रामक और इस्लाम विरोधी" अमेरिकी हितों को निशाना बनाएं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि अभी तक अमेरिका या जॉर्डन की ओर से नहीं की गई है।
सीरिया में भी हमले का आरोप
ईरानी मीडिया के अनुसार, IRGC ने सीरिया के अल-तनफ में स्थित अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन कमांड सेंटर पर भी हमला किया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरानी सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए की गई है।
यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिकी सेना ने फरवरी 2026 में कहा था कि उसने अल-तनफ बेस से वापसी कर ली है, जो सीरिया, जॉर्डन और इराक की सीमा पर स्थित है। इस हमले पर न तो सीरियाई सरकार और न ही अमेरिकी सेना ने कोई प्रतिक्रिया दी है।
गल्फ देशों पर भी हमले
ईरान ने अपने हमले का दायरा केवल जॉर्डन तक सीमित नहीं रखा। नॉर्थ इराक के कुर्द क्षेत्रों इरबिल और सुलेमानिया में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इसके अलावा, तेहरान ने कतर समेत अन्य खाड़ी देशों पर भी नए मिसाइल हमले किए। कुवैत में एक पावर और वाटर डिसेलिनेशन प्लांट को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।
अमेरिका के हमले तेज
अमेरिका ने भी ईरान पर हमले बढ़ा दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद, अमेरिका ने ईरान के कई पुल, बिजली उपकरण और एक महत्वपूर्ण पोर्ट पर स्थित टावर को निशाना बनाया। इसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पकड़ को कमजोर करना बताया जा रहा है।
ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों जैसे अहवाज, केशम, बुशहर, दश्ती, बोस्तान, सिरिक और बंदर ए लेंघे पर अमेरिकी हमले हुए हैं, जिससे काफी नुकसान हुआ है। वर्तमान में दोनों पक्षों के बीच हमले और प्रतिशोध का सिलसिला जारी है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
