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ईरान की न्यूक्लियर तैयारी: नागरिकों को आयोडीन गोलियां बांटने की शुरुआत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्लांट्स के आसपास रहने वाले नागरिकों को आयोडीन की गोलियां बांटनी शुरू कर दी हैं। यह कदम संभावित अमेरिकी हमले के प्रति तैयारी का संकेत है। जानें कि ये गोलियां कैसे काम करती हैं और उनका इतिहास क्या है। क्या ईरान को किसी हमले की जानकारी मिली है? इस लेख में जानें।
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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच एक नई खबर ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्लांट्स के आसपास रहने वाले लोगों को आयोडीन की गोलियां, जिसे पोटेशियम आयोडाइड कहा जाता है, वितरित करना शुरू कर दिया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि ईरान किसी संभावित अमेरिकी हमले के लिए तैयारियों में जुटा हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, यह गोलियां रेडिएशन से सुरक्षा का एक पुराना उपाय मानी जाती हैं।


हाल ही में ईरानी प्रशासन की एक आंतरिक बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण न्यूक्लियर ठिकानों, जैसे पिक एक्स माउंटेन, को निशाना बना सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगियों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियारों के विकास के करीब है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक वार्ता के टूटने और इजराइल तथा अमेरिका के आक्रामक रुख के कारण तनाव बढ़ गया है।


पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार संकेत दिए हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी सैन्य विकल्प खुले हैं। इसी कारण ईरान अब किसी भी संभावित न्यूक्लियर हमले के प्रभावों से निपटने के लिए तैयारियों में जुटा है।


आयोडीन गोलियों का महत्व

जब किसी न्यूक्लियर प्लांट पर हमला होता है या कोई परमाणु दुर्घटना होती है, तो हवा में खतरनाक रेडियोएक्टिव आयोडीन फैल जाता है। जब कोई व्यक्ति इसे सांस के जरिए ग्रहण करता है, तो यह उसके शरीर में चला जाता है और थायराइड ग्रंथि इसे तेजी से अवशोषित कर लेती है, जिससे थायराइड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में दी जाने वाली पोटेशियम आयोडाइड की गोलियां सामान्य आयोडीन से भरी होती हैं।


इन गोलियों का सेवन करने से थायराइड ग्रंथि पहले से ही सुरक्षित आयोडीन से भर जाती है, जिससे रेडियोएक्टिव आयोडीन का अवशोषण नहीं होता। हालांकि, यह स्पष्ट है कि पोटेशियम आयोडाइड न्यूक्लियर हमले से बचाने वाली कोई दवा नहीं है। यह केवल एक आपातकालीन उपाय है जो थायराइड को रेडियोएक्टिव तत्वों से बचाने में मदद करता है।


ऐसे समय में नागरिकों को इस तरह की गोलियां बांटने का इतिहास डरावना रहा है।


पार्श्वभूमि और ऐतिहासिक उदाहरण

इससे पहले, कई बड़े परमाणु संकटों के दौरान ऐसा किया गया है, जिसमें चर्नोबिल की दुर्घटना एक प्रमुख उदाहरण है। चर्नोबिल में हुई भयानक दुर्घटना के बाद, वहां के नागरिकों को बड़े पैमाने पर आयोडीन वितरित किया गया था। इसी तरह, 2011 में जापान में आई सुनामी के बाद फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट के लीक होने पर भी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह उपाय अपनाया गया था।


ईरान द्वारा अपने न्यूक्लियर स्थलों के आसपास आयोडीन गोलियों का वितरण यह दर्शाता है कि कूटनीतिक वार्ता से आगे बढ़कर संभावित न्यूक्लियर युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ईरान को कोई ठोस जानकारी मिली है कि अमेरिका न्यूक्लियर हमला करने वाला है।