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ईरान के नेता खामेनेई ने अमेरिका के साथ समझौते पर दी प्रतिक्रिया, क्या हैं उनकी शर्तें?

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते पर अपनी चिंताओं और शर्तों का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि वार्ता का मतलब यह नहीं है कि ईरान अमेरिकी नीतियों को स्वीकार कर रहा है। खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि वह अत्यधिक शर्तें थोपने की कोशिश करेगा, तो ईरान इसे स्वीकार नहीं करेगा। जानें इस महत्वपूर्ण वार्ता के पीछे की रणनीति और खामेनेई के विचार।
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ईरान के नेता खामेनेई ने अमेरिका के साथ समझौते पर दी प्रतिक्रिया, क्या हैं उनकी शर्तें?

खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया


नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस दस्तावेज़ को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं थीं। हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि किसी भी बातचीत में ईरान के राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखा जाएगा। इसके बाद उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दी।


समझौते पर खामेनेई की राय

अमेरिका और ईरान के बीच तैयार किए गए मसौदा समझौते पर वर्चुअल हस्ताक्षर के बाद खामेनेई ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रारंभिक राय अलग थी। उनका मानना था कि ऐसे समझौते में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। लेकिन जब उन्हें विश्वास दिलाया गया कि ईरानी जनता और देश की संप्रभुता सुरक्षित रहेगी, तब उन्होंने समझौते के लिए सहमति दी।


खामेनेई का संदेश

खामेनेई ने कहा कि राष्ट्रपति और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने उन्हें आश्वस्त किया कि बातचीत के दौरान ईरान के अधिकारों और रणनीतिक हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने समझौते को मंजूरी देने का निर्णय लिया।


उन्होंने उन लोगों को भी संदेश दिया जो अमेरिका के साथ बातचीत का विरोध करते हैं। खामेनेई ने कहा कि वार्ता का मतलब यह नहीं है कि ईरान अमेरिकी नीतियों को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि दोनों देशों के बीच बातचीत होती है, तो इसे किसी प्रकार की वैचारिक सहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


अमेरिका को चेतावनी

उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन बातचीत के दौरान अत्यधिक शर्तें थोपने की कोशिश करेगा, तो तेहरान इसे स्वीकार नहीं करेगा। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।


खामेनेई के ये बयान महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होंने ईरान की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया की झलक पेश की है। जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच 60 दिनों की महत्वपूर्ण वार्ता अवधि शुरू होने जा रही है, यह संकेत देता है कि ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर।