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ईरान के मोजतबा खामेनेई की स्वास्थ्य स्थिति पर बड़ा खुलासा

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य पर हाल ही में एक बड़ा खुलासा हुआ है। फरवरी में हुए एक बम हमले में घायल होने के बाद से वह सार्वजनिक जीवन से गायब हैं। जानें इस हमले के बाद उनकी स्थिति और ईरानी राष्ट्रपति का क्या कहना है। क्या मोजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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मोजतबा खामेनेई की बमबारी में चोट

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। फरवरी में तेहरान में हुए एक बम हमले में मोजतबा घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने उस अस्पताल को भी निशाना बनाया। बमबारी के बाद मोजतबा को मलबे से निकाला गया, और तब से वह सार्वजनिक जीवन से गायब हैं। जुलाई में अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी वह शामिल नहीं हुए।


तेहरान में बमबारी की घटना

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान में आयतुल्ला सय्यद अली खामेनेई के निवास पर एक बड़ा हमला किया। इस हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य, जिनमें उनकी पत्नी, बहू और पोती शामिल थीं, की जान चली गई। इसके बाद, हमलावरों ने तेहरान के तीन अस्पतालों पर भी बमबारी की, जिनमें से एक में मोजतबा खामेनेई का इलाज चल रहा था।


खुलासा करने वाला कौन?

कतर के अल अरबी टेलीविजन नेटवर्क से बातचीत में, ईरान के विशेषज्ञ मोहसेन हैदरी ने बताया कि मोजतबा के घायल होने के बाद तीन अस्पतालों पर बमबारी की गई। मोजतबा खामेनेई को तीसरे अस्पताल से मलबे में से निकाला गया।


मसूद पेजेश्कियन का बयान

इजरायल और अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में मोजतबा खामेनेई के गंभीर रूप से घायल होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, उनकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में कोई स्वतंत्र जानकारी उपलब्ध नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि सर्वोच्च नेता पूरी तरह से स्वस्थ हैं।


ट्रंप की राय

हाल ही में, जब डोनाल्ड ट्रंप से खामेनेई के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'वह बहुत गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसके शरीर का बायां हिस्सा, हाथ, पैर, सब कुछ घायल हुए थे। वह बहुत गंभीर रूप से घायल हुआ था, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उसकी मौत हुई है।'


विशेषज्ञ समिति पर हमले

मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया था, लेकिन सर्वोच्च नेता का चयन करने वाली विशेषज्ञ समिति भी अमेरिका और इजरायल के निशाने पर थी। इसी कारण कोम सचिवालय पर बमबारी की गई, जिसमें आठ लोगों की जान गई। इसके बाद, समिति की सभी बैठकें गुप्त रूप से आयोजित की गईं।