ईरान के विदेश मंत्री की अमेरिका को चेतावनी: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर रहेगा नियंत्रण
ईरान की सख्त चेतावनी
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को एक स्पष्ट चेतावनी दी है। ईरानी सरकारी मीडिया आईआरआईबी को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में, अराघची ने कहा कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज', जो वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, पर ईरान की स्थिति हमेशा मजबूत रहेगी। इस समुद्री मार्ग पर ईरान और ओमान का पूरा नियंत्रण होगा।
जहाजों से टैक्स वसूली
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, यहां से गुजरने वाले जहाजों से सीधे टैक्स नहीं लिया जा सकता, लेकिन उन्हें दी जाने वाली सेवाओं के लिए सर्विस फीस वसूली जाएगी। ईरान अपने मित्र देशों, चीन और ओमान के साथ मिलकर इस समुद्री ट्रैफिक का प्रबंधन कर रहा है। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका को अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की सख्त चेतावनी दी है।
सीक्रेट एग्रीमेंट का खुलासा
विदेश मंत्री अराघची ने वाशिंगटन के साथ चल रही बैक-चैनल डिप्लोमेसी और सीक्रेट डील के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझौता तैयार किया गया है, जिसके तहत ईरान की संपत्तियों को फ्रीज नहीं किया जा सकता।
डील के चरण
यह डील दो चरणों में विभाजित की गई है। पहले चरण में परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी, इसे दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि यूरेनियम की ताकत को कम करने की आवश्यकता पड़ी, तो यह काम ईरान के भीतर ही किया जाएगा।
क्षेत्रीय सुरक्षा और हिजबुल्लाह का समर्थन
ईरानी विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र या किसी विदेशी गठबंधन की भूमिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रक्षा के लिए किसी बाहरी समर्थन पर निर्भर नहीं है। ईरान के राजनयिक और सैन्य कमांडर लगातार संपर्क में रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान कभी भी हिजबुल्लाह को अकेला नहीं छोड़ेगा।
समझौते पर संदेह
साक्षात्कार के अंत में, अराघची ने अमेरिका की नीयत पर संदेह जताया, यह कहते हुए कि अमेरिकी नेताओं के लिए वादे तोड़ना सामान्य बात है। इस प्रकार, समझौते को लागू करने में कई बाधाएं आ सकती हैं। यदि इस मसौदे की शर्तें पूरी नहीं की गईं, तो अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे।
विरोध प्रदर्शन
वर्तमान में, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में कुछ सदस्य इस समझौते का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पूरी काउंसिल की सहमति से ही लिया जाएगा। जैसे ही काउंसिल से हरी झंडी मिलेगी, इस समझौते पर रिमोटली हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे।
