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ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व, पीएम मोदी को मिला न्योता

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बिहार के गवर्नर और विदेश राज्य मंत्री शामिल होंगे। पीएम मोदी को भी इस समारोह में आमंत्रित किया गया है। यह कार्यक्रम 4 से 9 जुलाई तक विभिन्न शहरों में आयोजित होगा, जिसमें लाखों लोग और कई देशों के गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में शोक का माहौल है, और उनके अंतिम संस्कार पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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नई दिल्ली में खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी


नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की ओर से बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा शामिल होंगे, यह जानकारी ईरानी स्रोतों के हवाले से एक मीडिया चैनल ने दी है।


प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रण

ईरान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खामेनेई के अंतिम संस्कार और दफनाने के समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह कार्यक्रम 4 से 9 जुलाई तक ईरान के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे, जिसमें लाखों लोग और कई देशों के गणमान्य व्यक्ति शामिल होने की उम्मीद है।


एक हफ्ते तक चलेंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

अंतिम संस्कार की गतिविधियाँ एक सप्ताह तक चलेंगी, जिनकी शुरुआत तेहरान से होगी और समापन मशहद में खामेनेई के दफनाने के साथ होगा। मशहद को शिया इस्लाम का एक पवित्र शहर माना जाता है और यह खामेनेई का जन्मस्थान भी है।


तेहरान में अंतिम दर्शन और राजकीय जुलूस

खामेनेई का पार्थिव शरीर 4 और 5 जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स में रखा जाएगा, जहां आम लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकेंगे। 6 जुलाई को राजकीय अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाएगा। इस दौरान तेहरान प्रांत में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की गई है।


ईरानी प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क है, क्योंकि विदेशी मेहमानों की बड़ी संख्या में आने की संभावना है। भारत की ओर से लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और पवित्र मार्गेरिटा का शामिल होना दोनों देशों के बीच के राजनयिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


खामेनेई की मौत और उसके प्रभाव

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में मारे गए थे। उनकी मौत के बाद से ईरान में शोक का माहौल है।


खामेनेई की मृत्यु को ईरान के 46 वर्षीय शिया धर्मतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है। उनके लंबे कार्यकाल ने ईरान की विदेश नीति और क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। अब उनके अंतिम संस्कार पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसमें कई देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। यह घटना ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।