ईरान के हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में यूएन का अभियान स्थगित
फारस की खाड़ी में नाविकों की सुरक्षा पर संकट
फारस की खाड़ी में फंसे 11 हजार नाविकों की सुरक्षा फिर से खतरे में पड़ी
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई है। हाल ही में एक पोत पर ईरान द्वारा ड्रोन हमले के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने वहां चल रहे अभियान को पूरी तरह से रोक दिया है। इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
यह ध्यान देने योग्य है कि ईरान ने मार्च के पहले सप्ताह में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिसके कारण सैकड़ों जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद, होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बनी थी, जिसके बाद यूएन ने फंसे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया था।
अभियान में व्यवधान का कारण
ड्रोन हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव फिर से बढ़ गया है। यह हमला उस समय हुआ जब संयुक्त राष्ट्र की टीम इस क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई थी। ओमान के तट के पास एक कार्गो जहाज पर हुए हमले के बाद, यूएन की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने इस रेस्क्यू अभियान को रोकने का निर्णय लिया है। इस फैसले से लगभग 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जो अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों पर मौजूद हैं।
सिंगापुर के झंडे वाले जहाज पर हमला
हाल के दिनों में, संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों की मदद से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा था। इस मिशन का उद्देश्य उन जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कराना था, जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण कई दिनों से फंसे हुए थे। इसी दौरान, ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी नाविक की मौत या गंभीर चोट की सूचना नहीं है। इसके तुरंत बाद, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए, पूरे रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
